जम्मू। यूनिवर्सिटी और सरकारी संस्थानों में वर्षों से चल रहे नियमितीकरण विवाद के बीच हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि लंबे समय तक काम करने से कर्मचारी को स्थायी नौकरी का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने बिना खुली चयन प्रक्रिया हुई नियुक्तियों को बैकडोर एंट्री मानते हुए नियमित करने से इनकार कर दिया।
मामला कश्मीर यूनिवर्सिटी के तीन जूनियर इंजीनियरों पीर मोहम्मद इशाक, तैजीम कयूम और ओबैस हमीद भट से जुड़ा है जो वर्ष 2017 से अस्थायी थे। हायर एंड फायर आधार पर मासिक वेतन पर नियुक्त किया था और समय-समय पर कार्यकाल को बढ़ाया गया। हाल ही में यूनिवर्सिटी ने जूनियर इंजीनियरों के पदों पर नियमित भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जिसके बाद कर्मचारियों ने याचिका में नियमित करने और नई भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। दलील दी कि पहले भी यूनिवर्सिटी में अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी और विश्वविद्यालय की नौकरियों में भर्ती संविधान के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार होती है। बिना विज्ञापन और सभी योग्य उम्मीदवारों को मौका दिए की गईं नियुक्तियां समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ हैं।
अदालत ने कहा कि पहले अस्थायी नियुक्तियां करना और बाद में नियमित की कोशिश करना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बैकडोर तरीके से हुई नियुक्तियों को नियमित नहीं किया जा सकता। हालांकि कर्मचारियों को राहत देते हुए कहा कि यदि वे पात्र हैं तो नियमित भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। उन्हें आयु सीमा में छूट दी जाएगी।