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वैष्णो देवी में पूजा के व्यवसायीकरण पर श्राइन बोर्ड को हाईकोर्ट का नोटिस

Wed, 19 Oct 2016 01:39 AM IST
जेएनएफ/जम्मू
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वैष्णो देवी - फोटो : File Photo
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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माता वैष्णो देवी के दर्शन व पूजा के व्यवसायीकरण की जनहित याचिका को मंजूर किया और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी व अन्यों को नोटिस जारी किया। 
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एडवोकेट सुमित नायर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका पेश कर माता वैष्णो देवी विकास बोर्ड के 31 मई 2008 और 11 मार्च 2008 के आदेशों को रद्द करने की अपील की।

याचिका में बताया गया बोर्ड ने माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना व पूजा के दौरान बैठने के लिए रेट फिक्स किया गया है। पवित्र गुफा के बाहर व अंदर दो आरती होती है। चौबीस घंटे में दो बार आरती होती है और लोगों को भी भीड़ भी पूरा वर्ष रहती है।
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संविधान में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं: याचिकाकर्ता

vaishno devi - फोटो : Amar Ujala
याचिकाकर्ता ने बताया कि आम भक्तों को रोक दिया जाता है। जिन भक्तों ने मोटी फीस दी होती है। उन्हें ही इस आरती में बैठने दिया जाता है। यही नहीं, जिन भक्तों ने बोर्ड द्वारा तय मोटी राशि दी हो तो उसे पहली पंक्ति में बिठाया जाता है। बोर्ड पूरी तरह से बिजनेस मैन की तरह काम कर रहा है। भक्तों की आस्था पर चोट पहुंचाई जा रही है।

जो लोग राशि नहीं दे पाते हैं, वह पंक्ति छोड़कर किसी भी पंक्ति में नहीं बैठ सकते हैं। भारतीय संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी भी धार्मिक स्थल में पूजा के लिए मोटी रकम अदा की जाए।

एडवोकेट सुनील सेठी ने दलील में कहा कि जम्मू-कश्मीर के संविधान में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना के लिए मोटी रकम ली जाए। बोर्ड का आदेश आम जनता की धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचा रहा है।

हर साल करोड़ों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। बोर्ड को इस प्रावधान को बदलकर जनता के लिए माता का दरबार खुले मन से  खोलने की अपील की। 
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