श्रीनगर में डाक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर (डाक) द्वारा जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच टीकाकरण की कमी के कारण घाटी में हेपेटाइटिस-बी के मामलों में वृद्धि हो रही है।
डाक अध्यक्ष डा. निसार-उल-हस्सन ने कहा कि बिना टीकाकरण के जो स्वास्थ कर्मचारी हैं, वह रोगियों के संक्रमण का एक निरंतर स्रोत हैं जो काफी चिंताजनक बात है।
निसार के अनुसार असुरक्षित चिकित्सा कर्मियों जो एचबीवी संक्रमण की चपेट में कभी भी आ सकते हैं, प्रत्येक दिन उनके साथ संपर्क में आ रहे रोगियों में पारित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मचारियों को बिना टीकाकरण रखा जाना अनैतिक है, क्योंकि इससे जनता के स्वास्थ्य को खतरा है।
डाक के अध्यक्ष के अनुसार अधिकतर अस्पतालों में काम करने वाले डाक्टर, नर्स और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को हेपेटाइटिस-बी वायरस (एचबीवी) से बचने के लिए टीकाकरण नहीं किया गया है। इस सबके कारण इन मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है।
उनके अनुसार एचबीवी सीररहोसिस, लिवर फेलियर या फिर मौत का कारण बन सकता है। ब्लड बैंक, असुरक्षित चिकित्सकीय इंजेक्शन और मैली डेंटल क्लीनिक संचरण के महत्वपूर्ण मोड माने जाते हैं।
उनके अनुसार उच्च जोखिम वाले समूहों की रक्षा करने के लिए सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण है और राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण अनिवार्य है।