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मूसलाधार बारिश से उफान पर दरिया, 26 लोग फंसे

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मौसम विभाग की चेतावनी सच साबित हुई। पर्वतीय इलाकों में तड़के और उसके बाद सुबह बारिश ने दरियाओं के जलस्तर को बढ़ा दिया। दोपहर को जिले के बड़े दरियाओं में पानी का बहाव खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। इससे अलग-अलग जगहों पर कई लोग फंस गए। प्रशासनिक अमले और स्थानीय लोगों के सहयोग से बाढ़ में फंसे लोगों को निकाला गया।
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बिलावर के डडवारा इलाके में तो दरिया के बीचों-बीच तीन परिवारों के छब्बीस लोग फंस गए। उन्हें तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। वहीं, निचले इलाकों में उज्ज दरिया की बाढ़ ने कोहराम मचाया। अलग-अलग स्थानों पर दर्जन भर लोग फंस गए। इन लोगों को निकालने के लिए प्रशासन ने अभियान शुरू कर दिया जो देर शाम तक जारी था।

अधिकृत जानकारी के अनुसार उज्ज दरिया में पानी का बहाव 80 हजार क्यूसेक्स रिकॉर्ड किया गया। यह स्तर दरिया के लिए बनाए गए खतरे के निशान से लगभग दोगुना है। उधर सेवा दरिया का जल स्तर भी बढ़ गया। रणजीत सागर बांध की झील में खतरे का निशान 524 फुट है, जबकि शुक्रवार को बांध की झील में पानी का स्तर 517 फुट पहुंच गया है।
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इसे देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं दरियाई नालों से सटे इलाकों में अलर्ट जारी करते हुए एहतियातन दरियाई क्षेत्र में जाने से परहेज करने को कहा गया है।

बुद्धल-चसाना रूट पर यातायात बहाल

राजोरी। जिले की बुद्धल तहसील को चसाना के साथ जोड़ने वाले रूट पर गिरी पस्सियों को हटाने के बाद शुक्रवार को करीब तीन दिन बाद यातायात बहाल कर दिया गया। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कड़ी मशक्कत के बाद पस्सियां हटाई और यातायात को सुचारु बनाया।

जानकारी के अनुसार बुद्धल के डंडूत, कुंडरदान और चसाना के गोटा, बोरा आदि क्षेत्रों में कई जगहों पर बड़ी-बड़ी पस्स्यिां गिर गई थीं। बीआरओ द्वारा कुछ स्थानों पर जेसीबी से पस्सियां हटाई गई और कई स्थानों पर विस्फोटक पदार्थ का प्रयोग कर सड़क पर गिरी चट्टानों को हटाया गया।

तीन दिन की कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार को इस रूट पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं बुद्धल के वरिष्ठ समाज सेवक फारू इंकलाबी व चसाना गोटा के सरपंच रघुवीर सिंह ने बीआरओ के प्रति आभार जताया है।

उन्होंने कहा कि इस रूट के बंद होने से बुद्धल में सरकारी डिग्री कालेज में पढ़ाई करने वाले कई विद्यार्थी हर रोज कालेज नहीं पहुंच पा रहे थे। इसके अलावा अन्य लोगों को भी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

फिल्ट्रेशन प्लांट में मिट्टी

उधमपुर। बारिश के कारण नगर में अब बिजली और पानी का संकट भी गहरा गया है। कई क्षेत्रों में तीन दिन से पानी सप्लाई नहीं हुई है। अघोषित बिजली कटौती के कारण लोग परेशान हैं। बिजली कटौती और फिल्ट्रेशन प्लांट में मिट्टी अधिक होने के कारण पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। नदी नालों में पानी की स्तर भी काफी अधिक होने से विभाग ने पानी की सप्लाई रोकी है।

उधमपुर के सुभाष नगर और मोआडा मोड़ इलाके में दो दिन से हो रही तेज बारिश के कारण बिजली बंद है। पिछले तीन दिन बिजली नहीं होने के कारण पानी की सप्लाई भी बाधित हुई। आसमान में बादल होने से दिन में भी कई लोगों के घरों में अंधेरा हो गया है। मोआड़ा मोड़ के सौरभ, बलदेव राज, सुनील कुमार के अनुसार तीन दिन से बिजली बंद है।

ट्रांसफार्मर खराब हो गया है। लोगों के मोबाइल भी चार्ज नहीं हुए हैं। इनवर्टर भी नहीं चल रहे। वहीं, सुभाष नगर, हाउसिंग कालोनी, दोमेल, दोमेल चौक में पानी की सप्लाई भी बाधित हुई है। बारिश के कारण लोग बावलियों पर भी नहीं जा पा रहे हैं। जहां से वह पीने का पानी ला सके। सुभाष चंद्र, शिव गुप्ता के अनुसार अगर पानी की सप्लाई बहाल नहीं हुई तो हाहाकार मच जाएगा।

- दिन के समय बिजली का अधिक इस्तेमाल हो रही है। लोगों को सुबह और शाम बिजली का कम उपयोग करना चाहिए। दिन में खराब मौसम के कारण लोग लाइटें जला रहे हैं। बिजली का सदुपयोग करना चाहिए।
अरुण गुप्ता, चीफ इंजीनियर
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सीमा पर चौपट हुई खेती

अरनिया। पूरी तरह मौसम पर निर्भर अरनिया के किसान गेहूं की फसल खराब होने से हताश हैं। लगातार हुई बारिश से क्षेत्र में गेहूं की करीब 85 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है। बची हुई 15 प्रतिशत फसल भी खराब होने की आशंका बनी हुई है।

क्षेत्र के किसान लाढा चाड़क, बबली चाडक, राम लाल, पूर्णचंद, दीवान चंद, अमरनाथ, गारा राम, हरवंश लाल का कहना है कि बीजाई के शुरूआती दौर में मौसम खुश्क रहने के बाद जब पहली बारिश हुई तो उस समय बंफर फसल होने की उम्मीद जगी थी।

लेकिन अचानक पड़ी कुदरत की मार से अब किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसानों का कहना है कि एक सप्ताह पहले तक पचास प्रतिशत फसल खराब हुई थी। तब किसानों को लग रहा था कि कम से कम बची फसल से गुजर-बसर हो जाएगा। लेकिन हाल की बारिश से नुकसान 85 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

अगर इसी तरह मौसम की मार पड़ती रही तो 95 प्रतिशत तक फसल का नुकसान हो सकता है। किसानों का कहना है कि बीते वर्ष पाक गोलाबारी के चलते धान की फसल खराब हो गई थी। शिविरों से लौटने के बाद बची फसल का भी सही दाम नहीं मिला।

किसानों का कहना है कि उन्हें दोतरफा मार पड़ रही। इसकी वजह से उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा। किसानों के अनुसार अभी तक सरकार की तरफ से उन्हें किसी तरह की राहत नहीं दी गई है, जो भी आता है उससे सिर्फ आश्वासन ही नसीब होते हैं।
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