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कश्मीरः बाढ़ में बहकर पाकिस्तान पहुंचे दस ग्रामीण

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कुदरत के कहर ने तीन दिनों से रियासत में कोहराम मचा रखा है। वीरवार को नौशेरा में बारातियों से भरी बस 67 लोगों सहित सैलाब में बह गई। इनमें से तीन के शव मिल गए हैं। भारी बारिश के कारण बस में बहे मुसाफिरों की तलाश भी ठीक से नहीं हो पा रही है।
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पुंछ जिले में कम से कम दस लोगों के पुलस्त नदी में बह जाने की खबर है। आशंका है कि ये बहकर पाकिस्तान पहुंच गए होंगे। रियासी जिले में एक बच्ची और एक महिला की डूबने से मौत हो गई। चिनैनी में भी एक बच्ची की मौत हो गई।

जम्मू-श्रीनगर, श्रीनगर-लेह राजमार्ग और मुगल रोड बंद हैं। वैष्णो देवी यात्रा भी रोक दी गई। चिनाब और झेलम समेत तमाम नदियां खतरे के निशान से ऊपर या बिलकुल करीब बह रहीं हैं।
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चारों ओर दिख रहा बस पानी ही पानी

श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी के सभी जिलों में पानी से भीषण तबाही का मंजर है। सब कुछ तहस-नहस सा हो गया है। दूर-दूर तक पानी ही पानी दिख रहा है। सेना और सरकारी अमला राहत व अचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश उनके काम में रुकावट बन रही है।

राज्य सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 20 करोड़ रुपए जारी किए हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उच्च स्तरीय बैठक में बाढ़ के हालात की समीक्षा करने के बाद कुछ बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा भी किया। बाढ़ का असर हजयात्रा पर भी पड़ा है।

पांच से सात सितंबर तक हज के लिए विमान रवाना नहीं होंगे। स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी कर दी गई है। मौसम विभाग ने शनिवार तक भारी बारिश पहाड़ों पर बर्फबारी की संभावना जताई है।

जी जान से जुटी सेना, राजनाथ ने की बात

बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को सलाह दी गई है कि नदियों के किनारे न जाएं और सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ें। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री से फोन पर चर्चा कर हर जरूरी मदद का आश्वासन दिया।

वीरवार को सबसे हृदयविदारक हादसे में लाम-दरहाल-नौशेरा मार्ग पर बारातियों से भरी बस उफनते नाले में जा गिरी। ड्राइवर, कंडक्टर सहित चार लोगों ने छलांग लगा दी, जिन्हें सेना ने बाहर निकाल लिया। बस में कुल 71 यात्री सवार बताए गए हैं। खबर लिखे जाने तक बस का कोई अता-पता नहीं था।

पुंछ की पुलस्त नदी में दस लोगों के बहने की बात कही जा रही है। इनमें मंडी के छह और पुंछ के चार लोग शामिल हैं। पुंछ में बाढ़ के कारण 132 केवी लाइन के 12 टावर ध्वस्त होने से बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई।

बाढ़ पीड़ित इलाकों में पहुंचे मुख्यमंत्री

इसके अलावा 12 ग्रीड स्टेशन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा बिजली के सैकड़ों पोल बह गए हैं। पुंछ में 60 साल के बाद ऐसी तबाही बरसी है। राजोरी और उधमपुर जिलों में दो सौ से ज्यादा इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। चिनाब के उफान से परगवाल सेक्टर के करीब एक दर्जन गांव डूब में आ गए हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि लोगों की सुरक्षा के लिए तमाम आवश्यक कदम उठाए जाएं। पुलिस कंट्रोल रूम में मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक में रियासत के बाढ़ प्रभावित इलाकों की रिपोर्ट ली। बाढ़ नियंत्रण मंत्री शाम लाल, राज्यमंत्री नजीर अहमद गुरेजी भी उपस्थित थे। दक्षिण कश्मीर में बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए 50 बोट रवाना की गई हैं।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने श्रीनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। बाढ़ की चपेट में आए बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल भी गए। उन्होंने मरीजों की सुरक्षा के लिए डाक्टरों को हर संभव कदम उठाने को कहे। वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर ने आपदा को देखते हुए 20 करोड़ रुपये की राशि रिलीज की है।

सेना से बचाव कार्य में मदद मांगी गई है। खासकर बाढ़ इलाके में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकाप्टर से राहत अभियान चलाने को कहा है। पंजाब सरकार से भी बोट उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया है।
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प्रधानमंत्री ने मौतों पर जताया शोक

वहीं प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से हुई मौतों पर शोक जताया और मृतकों के पीड़ित परिवारों को दो लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की ओर से घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा भी की गई है। पीएमओ की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित जम्मू-कश्मीर में लोगों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता की जाएगी।

सेना ने बचाई 250 लोगों की जान

मौसम के कहर से वीरवार शाम तक सेना द्वारा जम्मू संभाग में चलाए जा रहे बचाव अभियान में 250 लोगों को बचाया गया है। बचाव कार्य के दौरान सेना का जवान बलबीर सिंह पुंछ में शहीद हो गया। राजौरी, थन्ना मंडी और पुंछ में चलाए जा रहे बचाव अभियान के दौरान वीरवार को सेना द्वारा करीब 150 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। पुंछ में बाढ़ में खनेतर नाला पुल बह गया था। सेना की ओर से इस पुल का जल्द निर्माण किए जाने की कोशिश की जा रही है ताकि लोगों को कुछ राहत मिल सके।
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