दिल की बात, दिल के डाक्टर से, कार्यक्रम में मदांता-द मेडिसिटी के डीएम कार्डियोलाजी (चेयरमैन डिवीजन इलेक्ट्रोफिजियोलाजी) डा. बलवीर सिंह ने हृदय रोगों से बचाव के लिए जागरूक किया।
उन्होंने बताया कि एलडीएल केलोस्ट्राल पर नियंत्रण रखकर हार्ट अटैक से बचा जा सकता है। इस केलोस्ट्राल का स्तर सौ तक पहुंच जाने से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
जिसमें केलोस्ट्राल का स्तर पचास से नीचे होना चाहिए। अमूमन पचास आयु वर्ग में होने वाले हृदय रोग अब 25-35 वर्ष के युवाओं में भी हो रहे हैं।
हृदय रोगों से बचाव के लिए दवाइयों से पहले योगा बेहतर व्यायाम है। पिछले दस साल में पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर राज्य में तेजी से मधुमेह और हृदय रोगों के मरीज बढ़े हैं।
जेएंडके में विस्थापन, सीमा गोलाबारी, शहरीकरण, असामान्य जीवन चर्या, असामान्य खानपान आदि कारणों से तनाव के साथ केलोस्ट्राल की मात्रा बढ़ी है। हार्ट अटैक के मामलों में युवाओं में धूम्रपान बड़ा कारण है।
हृदय रोगों के बचाव के लिए स्कूल स्तर से जागरूकता को बढ़ावा दिया जाए। बाजार में बार बार एक ही तेल में पकाए जा रहे खाद्य पदार्थों को खाने से ट्रांसफैट से सबसे ज्यादा हार्ट अटैक की आशंका रहती है।
इसमें एलडीएल केलोस्ट्राल की मात्रा तेजी से बढ़ती है। पोलियो की तरह देश से हृदय रोगों पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
लेकिन इसके लिए जीवन चर्या में थोड़ा बदलाव लाने की जरूरत है। उत्तर भारत में तेजी से बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि केलोस्ट्राल को कम करने के लिए कई सफल दवाएं उपलब्ध हैं।
लेकिन इससे पहले प्राकृतिक तौर पर अन्य उपाय अपनाए जाने चाहिए। इस बीच डा. सिंह ने डाक्टरों से चर्चा करने के साथ सीएमई में अनुभव साझा किए।