जम्मू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजों को लेकर आगामी 23 अक्तूबर को उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजर है। इसमें कई अन्य पक्ष भी पार्टी बनने का समर्थन कर सकते हैं। चुनाव के बाद संघ का कार्यकाल का समय भी बीत रहा है। संघ के चुनाव से जुड़े मुद्दे पर न्यायालय ने कई पक्षों को सुना है।
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की जम्मू विंग ने नतीजों को घोषित किए जाने पर रोक लगाई है। इसे देखते हुए गत छह अक्तूबर को चुनाव के बाद मतगणना नहीं कराई गई थी। इसके अलावा सचिव पद के लिए अलग से चुनाव होना लंबित है। लेकिन न्यायालय के किसी आदेश के बाद ही सचिव पद के लिए चुनाव करवाने के साथ अन्य चुनाव प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार छात्र संघ के चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत करवाए गए हैं। लेकिन इस चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक यशोवर्धन सिंह और अन्य ने अदालत में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने चुनावी प्रक्रिया को यथावत रखते हुए इसे नतीजे घोषित किए जाने पर रोक लगाई है।
चुनावी नतीजों को लेकर छात्र संगठनों में इंतजार बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार करवाए गए चुनाव का मामला पहली ही बार न्यायालय के पास पहुंच गया है। जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरडी शर्मा का कहना है कि छात्र संघ के चुनाव नियमों के तहत करवाए गए हैं। लेकिन फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय के कोई आदेश के बाद ही आगे की प्रक्रिया की जाएगी।