- एम्स में उन्नत जीनोमिक्स और सटीक चिकित्सा केंद्र का आगाज
केंद्र के शुरू होने से बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार करने की अपनी क्षमता को और मजबूत करेंगे: जितेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एम्स जम्मू में रविवार को सेंटर फार एडवांस्ड जीनोमिक्स एंड प्रिसिजन मेडिसिन केंद्र की शुरुआत हो गई।विशेषज्ञों का कहना है कि इस केंद्र के खुलने से अब कैंसर से संबंधित टेस्ट के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसकी रिपोर्ट तत्काल मिलेगी। केंद्र का उद्घाटन करने पहुंचे पीएमओ में मंत्री डाॅ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र के शुरू होने से बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार करने की क्षमता मजबूत होगी। केंद्र से व्यक्तिगत चिकित्सा के एक नए युग की शुरुआत हुई है।
प्रारंभिक स्तर पर ही रोग का पता लगाना होगा संभव
केंद्र के खुलने से जीनोमिक डेटा को एआई-संचालित निदान के साथ एकीकृत करके प्रारंभिक रोग का पता लगाना संभव होगा। इसी के साथ उपचार की दिशा तय की जा सकेगी। साथ ही उपचार और परीक्षण में त्रुटियों को कम किया जा सकेगा। उपचार की दुनिया में यह क्रांतिकारी बदलाव है। जीन थेरेपी के कारण अब डॉक्टर एक ही तरह के दृष्टिकोण पर निर्भर नहीं रहेंगे। मरीज और उसके रोग के हिसाब से ज्यादा प्रभावी उपचार संभव होगा। ये सुविधा सटीक ऑन्कोलॉजी, काॅर्डियोवैस्कुलर जीनोमिक्स और दुर्लभ विकारों के लिए आनुवंशिक जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निवारक सेवा की क्षमता बढ़ी
मंत्री ने कहा कि भारत ने पहले ही निवारक स्वास्थ्य सेवा में खुद को साबित कर दिया है। दुनिया की पहली डीएनए-आधारित कोविड-19 वैक्सीन और एचपीवी वैक्सीन जैसे नवाचारों में अग्रणी है। इसी कड़ी में यह केंद्र हमारी उपलब्धि है। केंद्र का एक प्रमुख उद्देश्य सटीक चिकित्सा को आम जनता के लिए किफ़ायती और सुलभ बनाना है। जबकि व्यक्तिगत उपचार पारंपरिक रूप से महंगे रहे हैं। एम्स जम्मू का उद्देश्य लागत कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सटीक चिकित्सा को एकीकृत करने के लिए स्वदेशी अनुसंधान और सरकार समर्थित बायोटेक पहलों का लाभ उठाना है।
जैव-अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही
जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-संचालित प्रगति को प्राथमिकता दी है। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था में तेजी से वृद्धि हो रही है। 2014 में मात्र 10 बिलियन डॉलर से आज लगभग 130 बिलियन डॉलर तक ये पहुंच गई है। हमारा लक्ष्य इसे 300 बिलियन डॉलर तक ले जाने का है। 2014 में केवल 50 की तुलना में 9000 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप के साथ भारत तेजी से चिकित्सा नवाचार में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है।
तीन दिवसीय सम्मेलन में पहुंचे विश्वभर से 800 प्रतिनिधि
स्वास्थ्य सेवा में ये सम्मेलन गेम चेंजर होगा: डाॅ. लहोरी
इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैलिएटिव केयर (आईएपीसी) का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। इसमें दुनिया भर से 800 से अधिक प्रतिनिधि डॉक्टरों और स्वयंसेवकों ने भाग लिया। सम्मेलन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच सार्थक आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान की। इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैलिएटिव केयर के जम्मू-कश्मीर चैप्टर के अध्यक्ष डॉ रोहित लहोरी ने बताया कि ये पहला ऐसा बड़ा सम्मेलन है, जिसमें दुनिया भर से इतनी बड़ी तादाद के प्रतिनिधियों और शिक्षकों ने भाग लिया।
बताया कि आईएपीसीओएन के इतिहास में ये पहली बार था कि डाक्टरों, पैरामेडिक्स और स्वयंसेवकों द्वारा 285 पेपर प्रस्तुत किए गए। जिसमें मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल थीं।