अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बदलते मौसम और असंतुलित दिनचर्या लोगों में नसों के खिंचाव और मांसपेशियों में जकड़न की समस्या बढ़ा रही है।
स्वास्थ्य रिपोर्ट और चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक जो बीमारियां पहले केवल बुजुर्गों या उम्रदराज लोगों में देखी जाती थीं वे अब युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की ओपीडी में नसों में खिंचाव और मांसपेशियों के दर्द से पीड़ित युवाओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है।
डॉक्टरों का कहना है कि घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, शारीरिक निष्क्रियता और हवा में घुला जहर युवाओं के नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला कर रहा है। अस्पताल के काॅर्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार नसों में खिंचाव की समस्या के साथ-साथ दिल की बीमारी के मरीजों की संख्या भी ओपीडी में तेजी से बढ़ी है।
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि रक्त वाहिकाओं में खिंचाव और कड़ापन आने से दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह समस्या प्रदूषण बढ़ने का कारण भी हो सकता है क्योंकि हवा में सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) सांस के जरिए खून में मिलकर नसों में सूजन और ब्लॉकेज की समस्या पैदा करते हैं।
नसों के इस खिंचाव के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर गर्दन, पीठ और पैरों में असहनीय दर्द की शिकायतें आ रहीं हैं।