- खून से यूरिया कितनी साफ हुई, मिलेगी जानकारी, हवा और खून के रिसाव पर रहेगी नजर
- बिजली गुल होने पर 20 मिनट तक चलेगी मशीन, मरीज की सुरक्षा के लिए कई इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डायलिसिस के दौरान मरीज को कितना फायदा हुआ, इसका पता अब इलाज के साथ ही चलता रहेगा। मशीन बताएगी कि खून से यूरिया जैसी गंदगी कितनी साफ हुई और मरीज को जरूरत के मुताबिक डायलिसिस मिला या नहीं। नली में हवा जाने या खून का रिसाव होने पर भी मशीन तुरंत चेतावनी देगी।
स्वास्थ्य ने ऐसी सुविधाओं वाली हेमोडायलिसिस मशीनों के खरीदने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। डायलिसिस में मरीज के खून से शरीर में जमा यूरिया और अतिरिक्त पानी निकाला जाता है। मशीन में ऐसी सुविधा होगी, जिससे इलाज के दौरान ही पता चलता रहेगा कि खून से यूरिया कितनी साफ हुई है।
इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलेगी कि मरीज को जरूरत के मुताबिक डायलिसिस मिल रहा है या नहीं। मशीन में केटी/वी की निगरानी भी होगी। आसान भाषा में यह एक पैमाना है, जिससे पता चलता है कि मरीज को दी गई डायलिसिस की मात्रा पर्याप्त है या नहीं। इसकी जानकारी इलाज के दौरान ही मिलती रहेगी।
डायलिसिस के बीच बिजली जाने पर मशीन में कम से कम 20 मिनट का बैटरी बैकअप रहेगा। यानी बिजली गुल होते ही मशीन बंद नहीं होगी। इससे बिजली जाने के बाद डायलिसिस की प्रक्रिया को संभालने के लिए समय मिलेगा।
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खून में हवा या रिसाव पर तुरंत चेतावनी, पानी और सफाई का भी ध्यान
डायलिसिस के दौरान मरीज का खून मशीन तक जाता है और फिर वापस शरीर में पहुंचता है। इस दौरान नली में हवा के बुलबुले आने या खून का रिसाव होने पर परेशानी हो सकती है। मशीन में दोनों का पता लगाने वाले सेंसर होंगे। खून के दबाव पर भी नजर रखी जाएगी। किसी गड़बड़ी की स्थिति में मशीन चेतावनी देगी। डायलिसिस में इस्तेमाल होने वाले पानी को साफ रखने के लिए मशीन में फिल्टर की व्यवस्था होगी। डायलिसिस के बाद मशीन की सफाई और कीटाणु हटाने की सुविधा भी रहेगी। शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने की मात्रा को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
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हेमोडायलिसिस मशीनों के रेट कांट्रेक्ट के लिए निविदा जारी की है। इसके बाद जरूरत के अनुसार अलग-अलग अस्पतालों के के लिए मशीनों की आपूर्ति के आदेश दिए जा सकेंगे।
- तारिक हुसैन गनई, एमडी, जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड