जम्मू। पिछले लंबे समय से प्रचंड गर्मी के कारण इंसानों के साथ जीव जंतु बेहाल हैं। जीएमसी के रेबीज सेक्शन में रोजाना जानवरों के काटने के 35 से 45 नए मामले आ रहे हैं। इनमें 90 प्रतिशत तक मामले कुत्तों के काटने के हैं, जिनमें अधिकांश घरों में पालतू कुत्तों के काटने के हैं। डाॅक्टरों के अनुसार आगामी कुछ महीनों तक मौसम के लिहाज से जानवरों के काटने के मामले में वृद्धि होगी।
पिछले मई माह में जीएमसी के रेबीज सेक्शन में 3100 से अधिक जानवरों के काटने के मामले रिपोर्ट हुए हैं। इनमें 1000 से अधिक नए मामले थे, जिनमें अधिकांश कुत्तों के काटने के मामले हैं। यानी औसतन जीएमसी में हर माह एक हजार नए जानवरों के काटने के मामले पहुंच रहे हैं। डाॅक्टरों के अनुसार शहरों में लोगों को घरों में कुत्तों, बिलियों व अन्य प्रजातियों के जानवरों के पालने का चलन बढ़ा है। इससे घर में ही पालतू जानवर खासतौर पर बच्चों को शिकार बना रहे हैं। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर के 75 वार्डों में अनुमानित 40 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं।
निगम का दावा है कि हजारों कुत्तों की नसबंदी कर दी गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुत्तों की बढ़ती संख्या से ये दावे खोखले नजर आ रहे हैं। जीएमसी के रेबीज सेक्शन में हर साल दस हजार मामले आ रहे हैं। रेबीज सेक्शन में वर्ष 2019 में 10952 मामले आए थे। उस साल रेबीज से पांच पीड़ितों की मौत हुई थी।
जिला स्तर पर पीड़ितों को नहीं लगाया जा रहा सिरम
जम्मू। किसी जानवर के काटने पर रक्त बहने के स्थान पर सिरम के साथ वैक्सीन लगाई जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला स्तर पर पीड़ितों को सिरम की सुविधा उपलब्ध करवाने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं है। जीएमसी के रेबीज सेक्शन में जम्मू जिला से ही अधिकांश पीड़ित सिरम लगाने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। एक कर्मी ने बताया कि जिला स्तर पर सिरम तो उपलब्ध रहती है, लेकिन पीड़ित को लगाने की कोई हिम्मत नहीं करता है, जिससे अधिकांश पीड़ित जीएमसी का ही रुख कर रहे हैं। हालांकि जिला स्तर पर वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन सिरम के लिए पीड़ितों को जीएमसी जम्मू तक आना पड़ रहा है।