गंभीर मरीजों को नहीं मिल रही विशेषज्ञ सेवाएं, जीएमसी की बढ़ रही निर्भरता
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू संभाग के चार नए राजकीय मेडिकल कॉलेजों (जीएमसी) में मरीज विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। कई बीमारियों के डॉक्टर नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद सृजित नहीं किए गए हैं। गंभीर मरीज जम्मू रेफर किए जा रहे हैं।
प्रदेश में जिलास्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए कठुआ, डोडा, उधमपुर और राजोरी में एक-एक जीएमसी शुरू किया गया है, लेकिन यहां स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है। इससे गंभीर मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा। उन्हें मजबूरन जीएमसी जम्मू आना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति जीएमसी राजोरी की है। यहां से जून में ही 80 मरीजों को जम्मू रेफर किया गया है। कठुआ से 74 और डोडा से 47 मरीज रेफर किए गए हैं। जीएमसी डोडा व कठुआ में सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों के पद ही सृजित नहीं हैं। यह दोनों अस्पताल 2019 से चल रहे हैं। यहां एमबीबीएस की पढ़ाई होती है। न्यूरोलॉजिस्ट, हृदय रोग विशेषज्ञ, कैंसर रोग विशेषज्ञ, प्लास्टिक सर्जन जैसे विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं।
एमआरआई जैसे आवश्यक मशीनों का भी अभाव है।
जीएमसी डोडा : 104 पद स्वीकृत, 58 खाली
जीएमसी डोडा के प्रिंसिपल डॉ. राकेश बहल ने कहा कि 2019 में सेवाएं शुरू कीं। एमबीबीएस का पहला बैच 2020 से शुरू हुआ। 300 बैड की क्षमता वाला जीएमसी है। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद सृजित नहीं हैं। बावजूद इसके हम लोगों को बेहतर सेवाएं देने की कोशिश कर रहे हैं। कुल 104 पद स्वीकृत हैं जिनमें 58 खाली हैं। डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से विभाग को अवगत करवाया गया है। नए ब्लॉक लगभग बनकर तैयार हैं। इससे बैड की क्षमता बढ़कर 550 तक हो जाएगी। इससे लोगों को लाभ मिलेगा।
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जीएमसी कठुआ : न्यूरोलॉजिस्ट, हृदय रोग विशेषज्ञ, कैंसर व प्लास्टिक सर्जन नहीं
जीएमसी कठुआ के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री ने कहा कि स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों के पद सृजित नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को रेफर करना पड़ता है। 2019 में जीएमसी 300 बैड से शुरू हुआ था। अभी हम 500 बैड तक पहुंच गए हैं, लेकिन स्टाफ की कमी है। हर दिन दो से तीन रेफर सिर्फ न्यूरोलॉजिस्ट के न होने से होते हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ, कैंसर और प्लास्टिक सर्जन नहीं हैं। स्टाफ की कमी से विभाग अवगत है।
जीएमसी उधमपुर : 235 पद स्वीकृत, 130 पर तैनाती
जीएमसी उधमपुर के प्रिंसिपल डॉ. प्रमोद कलसोत्रा ने कहा कि 2023 में जीएमसी शुरू हुआ है। यहां का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। ऐसे में ज्यादा जानकारी नहीं है। स्टाफ की कमी बड़ी चुनौती है। जीएमसी में 235 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 130 पद ही भरे गए हैं।
सरकार ने जिलों में जीएमसी खोले, बुनियादी ढांचा बनाया, लेकिन कर्मचारियों व स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की। जीएमसी, जिला अस्पताल से रेफर होने वाले मरीजों की समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने ऑडिट सिस्टम शुरू किया था। इसमें जांच की जाती है आखिर मरीज रेफर क्यों हुआ, किसी सुविधा के अभाव में ऐसा करना पड़ा। इससे पता चलता है कि कमी कहां है। सरकार प्रयास कर रही कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले। इसमें हर स्तर पर काम करना होगा, ताकि हम लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं दे सकेंगे।
नसीब चंद डिंगरा, पूर्व प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
स्वास्थ्य विभाग के सचिव का तर्क
राजकीय मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बारे में स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह से पूछा गया तो पहले उन्होंने इस तरह की बात होने से मना किया। जब उन्हें डोडा और कठुआ जीएमसी के हालात के बारे में बताया गया तो उन्होंने कहा कि हम इसे लेकर योजना बना रहे हैं। सब कुछ अच्छा होगा।