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गली-मोहल्लों में अब पंजीकरण करवाने पर ही चल सकेंगे क्लीनिक

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जम्मू। अब गली-मोहल्लों में पंजीकरण के बिना क्लीनिक नहीं चल पाएंगे। मरीजों को निजी स्तर पर देख रहे डॉक्टरों को भी खुद को पंजीकृत करवाने के साथ पूरा ब्योरा देना होगा। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में चंडीगढ़ की तर्ज पर क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 लागू किया गया है। इसके तहत सभी तरह की क्लीनिकल गतिविधियां चलाने वाले केंद्रों को पंजीकृत करवाना अनिवार्य होगा। एक्ट के तहत संबंधित जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के पास क्लीनिक सेंटर पंजीकृत होंगे। इसे पहले यह व्यवस्था स्वास्थ्य निदेशालय के पास थी, लेकिन इसमें वे डॉक्टर बाहर थे, जो निजी एकल स्तर पर मरीजों को देख रहे थे या क्लीनिक चला रहे थे।
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एक्ट में संबंधित कमेटी में डीसी को-चेयरमैन, सीएमओ को-संयोजक के अलावा एएसपी, नगर निगम के हेल्थ आफिसर और पैरा मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सदस्य के तौर पर काम करेंगे। ये एक्ट के तहत प्रावधानों को अमल में लाने के लिए निगरानी के साथ उचित कार्रवाई करेंगे। क्लीनिकल गतिविधियों में लेबोरेटरी, क्लीनिक चला रहे एकल डॉक्टर आदि शामिल होंगे।
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पहले चरण में 87 क्लीनिक किए पंजीकृत
सीएमओ कार्यालय जम्मू की ओर से पहले चरण में ऐसे 87 क्लीनिकल केंद्रों को पंजीकृत किया गया है, हालांकि जिले में यह आंकड़ा सैकड़ों में है। नए एक्ट के तहत यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा, जिसमें क्लीनिक चला रहे एकल डॉक्टर को भी खुद को पंजीकृत करवाना होगा। अल्ट्रासाउंड के लिए अलग से अधिसूचना जारी होने वाली है।
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क्लीनिक में खामियां होने पर नहीं होगा पंजीकरण
नए एक्ट के तहत क्लीनिक चलाने वाले आवेदक को पहले एक साल की प्रोविजनल अनुमति दी जाएगी, जिसके बाद उसे दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। इसमें अधिकतम दो साल की प्रोविजनल अवधि होगी, लेकिन एक साल के बाद आवेदक स्थायी तौर पर पंजीकृत हो सकता है, बशर्ते उसे एक्ट के सभी नियमों के तहत क्लीनिक में खामियों को दूर करना होगा। अगर ऐसा करने में वह सक्षम नहीं होता है तो उक्त केंद्र को बंद कर दिया जाएगा। इसमें क्लीनिकल सेंटरों को विभिन्न श्रेणियों में लिया गया है। इस एक्ट के तहत जिला स्तर पर यह पूरी जानकारी होगी कि कि कौन कहां किस तरह की क्लीनिकल गतिविधि चला रहा है।
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एक्ट के तहत पंजीकृत किए जा रहे केंद्र : सीएमओ
सीएमओ जम्मू डॉ. जेपी सिंह का कहना है कि क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत सौ के करीब नए पंजीकरण किए गए हैं।
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