सुनवाई के दौरान सिब्बल ने वांगचुक के लिए मेडिकल सहायता और पत्नी से मुलाकात की भी मांग की। इस पर मेहता ने बताया कि मेडिकल जांच के दौरान वांगचुक ने खुद कहा कि वह कोई दवा नहीं ले रहे हैं, लेकिन जरूरत होने पर उन्हें मेडिकल सहायता दी जाएगी। वहीं, पत्नी से मुलाकात के लिए दी गई अर्जी पर विचार किया जा रहा है।
मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक की पत्नी मीडिया में भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं ताकि ऐसा लगे कि वांगचुक को इलाज और मुलाकात से वंचित किया जा रहा है।
वांगचुक को 26 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किया गया था और उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। इस हिंसा में चार लोगों की मौत और 80 से अधिक लोग घायल हुए थे। वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप है और उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया है।
हालांकि याचिका में दावा किया गया है कि वांगचुक ने केवल गांधीवादी और शांतिपूर्ण आंदोलन किया था, और उन्हें अवैध रूप से चुप कराने की मंशा से हिरासत में लिया गया है। याचिका में कहा गया है कि उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और पाकिस्तान व चीन से संबंध जैसी बेबुनियाद बातें फैलाकर उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है।
पत्नी गीतांजलि अंगमो ने यह भी सवाल उठाया है कि वांगचुक को लद्दाख से 1,000 किलोमीटर दूर जोधपुर जेल क्यों भेजा गया, जबकि उनका आंदोलन वहीं चल रहा था।