संगीत का शौकीन कश्मीर का नौजवान अल्ताफ अहमद मीर 90 के दशक में पाकिस्तान चला गया था। मन नहीं लगा तो वह लौट आया, लेकिन फिर पीओके चला गया। अब उसके एक गाने ने परिवार वालों की उम्मीद जगा दी कि वह जल्द घर लौट आएगा।
पाकिस्तान के कोक स्टूडियो द्वारा पीओके के मुजफ्फराबाद में फिल्माया गया पहला कश्मीरी गाना श्हां गुलो तुही मा सा वुछवुन यार म्योन (ओ फूल क्या तुमने मेरा यार देखा है...) यूट्यूब पर अपलोड होने के पांच दिनों के भीतर साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने इस गाने को देखा है। यह गाना न सिर्फ लोगों के जुबां पर है, बल्कि इसने परिवार के एक बिछड़े को मिलाने की उम्मीद जगा दी है।
अल्ताफ अहमद मीर जो 1990 में 22 वर्ष का था। वह आतंकी बने के लिए पाकिस्तान चला गया था। आज उसका गाना देख उसकी मां की आंखें नाम हो गई हैं। हालांकि मां साजा बानो को उर्दू या हिंदी बोलना नहीं आता, लेकिन गाना सुनते हुए उसके हावभाव देख भावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अल्ताफ के भाई जावेद अहमद मीर के अनुसार उनका बड़ा भाई बचपन से ही संगीत का शौक रखते थे। पाकिस्तान जाने के बाद कश्मीर में 1994 में लौटे थे। यहां हालात अनुकूल न पाते हुए मुजफ्फराबाद चले गए। वहां उन्होंने एक एनजीओ के लिए काम करना शुरू कर दिया।
जावेद के अनुसार इतने सालों तक उनके साथ कोई संपर्क नहीं था। अब वीडियो देखकर फिर मिलने की आस जगी है। हम चाहते हैं दोनों देशों की सरकारें हालात ठीक करने की कोशिश करें ताकि वह घर लौट सके। जावेद ने यह भी बताया कि उनके भाई ने वहां शादी कर घर बसा लिया है।