बचपन से आसमान में उड़ने का सपना देखने वाली जम्मू की एक बेटी ने अपना सपना साकार कर लिया है। इससे न सिर्फ उसने अपना सपना साकार किया, बल्कि प्रदेश का सिर भी गर्व से ऊंचा कर दिया। साथ ही साथ यह भी साबित कर दिया कि ऊंची उड़ान भरने के लिए कोई सीमा और दायरे की बंदिश नहीं है।
जम्मू शहर के रिहाड़ी कालोनी की रहने वाली 22 साल की हंसजा शर्मा भारतीय सेना में पायलट के रूप में चयनित हुई है। वह प्रदेश की पहली महिला सैन्य अफसर है, जिसने यह मुकाम हासिल किया है। हंसजा की इस उपलब्धि पर परिवार भी गदगद है। हंसजा भी सपना साकार करके गौरवान्वित है।
हंसजा के अनुसार, मैं एनसीसी की कैडेट रही हैं। 2 साल पहले मेरा लेफ्टिनेंट के लिए सलेक्शन हुआ था। यहां से मुझे एक प्लेटफार्म मिल गया। यहां से मैं अपना सपना सच कर सकती थी। बचपन से ही आसमान में उड़ने का शौक था।
मुझे इसका मौका मिला। इसे मैंने एक चुनौती के रूप में लिया। इसके लिए मुझे पायल एप्टीच्यूड बैटरी टेस्ट पास करना था। इसके लिए मैंने आवेदन किया और पास कर लिया। बचपन में जब हवाई जहाज उड़ते देखती थी तो सोचती थी कि एक दिन मुझे भी जहाज उड़ाना है।
मां ने किया प्रेरित
हंसजा कहती है कि किसी की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा योगदान परिवार का होता है। मेरे साथ भी ऐसा ही है। लेकिन सबसे ज्यादा मुझे मेरी मां का सहयोग मिला। उन्होंने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया। जब भी उनसे बात करती थी, तो वह हिम्मत देती थी। इसके अलावा मेरे सीनियर ने भी मुझे बहुत सहयोग दिया और मुझे ऐसा करने की तैयारी में मदद की।
सपना सच करना है तो हिम्मत करनी होगी
सपना देखना और उसे पूरा करने के लिए किसी चीज की बंदिश नहीं है। हां इतना जरूर है कि इसके लिए कुछ लोगों का सहयोग होना जरूरी है। सहयोग के बिना कुछ नहीं हो सकता। जो लड़कियां कोई सपना देखती हैं, तो उसको पूरा करने के लिए उनको हिम्मत करनी होगी। दूसरा मेरा मानना है कि परिवार को साथ देना चाहिए।
पोजिशन होल्डर थी बेटी
हंसजा के पिता उमेश शर्मा का कहना है कि बेटी दसवीं और 12वीं में पोजिशन होल्डर थी। काफी होनहार और इंटेजिलेंट थी। एनसीसी में जब थी तो उसने कहा कि मुझे सेना में जाना है। इसके लिए वह उसने मेहनत की और लेफ्टिनेंट बनी। बाद में उसने कहा कि वह पायलट बनना चाहती है। हमने भी उसको इसके लिए प्रोत्साहित किया।