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'आंखों के सामने बह गया हमारे सपनों का आशियाना'

Sat, 13 Sep 2014 02:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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आंखों के सामने पल भर में हमारे आशियाने बह गए। जिंदगी में तवी नदी में हमने कभी ऐसी बाढ़ नहीं देखी थी। अस्थायी घरों के साथ सब कुछ पानी में बह गया। बढ़ते पानी को देख न भागते तो आज जिंदा न होते। यात्री निवास भगवती नगर में ठहराए गए बाढ़ पीडि़तों की जुबां पर यही कहानी है। बाढ़ में इनकी छत छिन गई है।
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खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं। तवी में आई भीषण बाढ़ से नवाबाद के पीछे तवी किनारे झुग्गी-झोंपडि़यां तेज बहाव से तवी में समा गए। यात्री निवास में शरण लिए गुरदीप सिंह ने बताया कि पानी में सिर्फ जान बची, बाकी सब कुछ खत्म हो गया है। नम आंखों से सिंह ने बताया कि पांच सितंबर को सुबह जब कुछ लोग तवी पर गए तो अचानक आवाजें आने लगीं, भागो पानी आ गया है...।

जब बाहर आकर देखा तो पानी करीब पहुंच चुका था। बच्चों के साथ किसी तरह जान बचाकर भागना पड़ा। आंखों के सामने सब कुछ बह गया। पीडि़त कृष्णा ने बताया कि उन्हें अब भविष्य की चिंता सताए जा रही है। यहां खाने पीने और ठहरने को तो मिल रहा है लेकिन बच्चों के भविष्य का क्या होगा। पिछले आठ दिन से कोई बच्चा स्कूल नहीं जा सका है। यात्री निवास में करीब सौ पीडि़तों को रखा गया है।
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बुजुर्ग हरबचन कौर ने बताया कि जिंदगी में कभी भी तवी नदी में पानी के ऐसे तेज बहाव को देखा। यह प्रलय ही थी, जो सब कुछ साथ ले गई। पीडि़त जनक राज ने बताया कि कई कुनबों के सदस्य बेघर हो गए हैं। बच्चों में खुशबू, सुमित, आयुष, अमन ने बताया कि बाढ़ में हमारी किताबें और वर्दी भी बह गई है। हम कई दिन से स्कूल नहीं गए हैं। पीडि़तों के लिए रेडक्रास सोसायटी की ओर से निशुल्क खाने की व्यवस्था की गई है।

बच्चों के लिए स्टोरी नरेट, ड्राइंग, स्माल गेम्स आदि गतिविधियां शुरू की गई हैं। सोसायटी की वालंटियर स्तुति और सादत ने बताया कि बच्चों के लिए ऐसी गतिविधियां शुरू करने का उद्देश्य उन्हें व्यस्त रखना है। पिछले कई दिन से ऐसी कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
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