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पीआईबी सरकार, पत्रकारों और जनता के बीच का पुल है : गुलाम अब्बास

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भारतीय जनसंचार संस्थान में सत्रारंभ कार्यक्रम आयोजित

जम्मू. “प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) सरकार, पत्रकारों और जनता के बीच का पुल है। यह प्रतिदिन कई स्थानीय भाषाओं में प्रेस विज्ञप्ति जारी करता है और सरकारी कार्यक्रमों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता लाने के लिए कार्य करता है”, केंद्रीय संचार ब्यूरो, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संयुक्त निदेशक गुलाम अब्बास शुक्रवार को भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में नए बैच के विद्यार्थियों को सत्रारंभ कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे. इस मौके पर गुलाम अब्बास ने कहा कि पीआईबी एक राज्य से दूसरे राज्य तक में विकास से जुड़े कार्यों को लेकर संबंधित विचारों के आदान-प्रदान के लिए काम करता है. यह जमीनी स्तर के पत्रकारों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी करता है।

सत्रारंभ कार्यक्रम में आकाशवाणी के पूर्व स्टेशन निदेशक शमिंदर कुमार ने कहा कि ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) या आकाशवाणी का अनुशासन अद्भुत है और पत्रकारिता के विद्यार्थियों के रूप में प्रत्येक छात्र को समय के मूल्य को समझना चाहिए. आकाशवाणी ने स्थानीय भाषा में कई कार्यक्रम तैयार करता है. इसके कार्यक्रम किसानों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी), जम्मू एवं कश्मीर एवं लद्दाख की उप निदेशक आयुषी पुरी ने पीएसयू, सरकारी अधिकारियों और सोशल मीडिया के साथ 360-डिग्री संचार प्रक्रिया किस तरह केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) करता है, इसका जानकारी साझा की. उन्होंने सीबीसी के इतिहास और कार्यों की चर्चा करते हुए बताया कि सीबीसी ऑडियो-विज़ुअल अभियान, छोटे वीडियो ग्राफिक्स, प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रसार, आउटडोर और सोशल मीडिया अभियानों के साथ-साथ समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की विज्ञापन दरों आदि को लेकर कार्य करता है.
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जम्मू के डिजिटल इंटरप्रेन्योर दिव्यवासु शर्मा ने भी डिजिटल पत्रकारिता के दायरे को साझा किया और बताया कि कैसे लोगों की भावनाओं के विश्लेषण ने सूचना बाजार के परिदृश्य को बदलकर रख दिया है. उन्होंने कहा कि गलत सूचना आज की दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. इस समारोह में दूरदर्शन के पूर्व उप निदेशक संजीत खजूरिया ने दूरदर्शन के बारे में बात की और अपने डीडी न्यूज के दिनों के दौरान रिपोर्टिंग के अनुभवो को साझा किए. आईआईएमसी के क्षेत्रीय निदेशक प्रोफेसर अनिल सौमित्र ने सत्रारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता की और संचालन सह-प्राध्यापक डॉ. दिलीप कुमार ने किया। इस मौके पर तीनों पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों ने प्रश्नों के जरिये अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया.

सत्रारंभ के दूसरे सत्र में भारतीय जन संचार संस्थान की नवनियुक्त अधिकारी आयुषी पुरी, उप. निदेशक (प्रशासन), रवि कुमार, प्रशासनिक सलाहकार और संकाय डॉ. अंशुला गर्ग, सहायक प्रोफेसर, अंग्रेजी पत्रकारिता और यासिर अराफात, सहायक प्रोफेसर, हिंदी पत्रकारिता का क्षेत्रीय निदेशक प्रोफेसर अनिल सौमित्र ने स्वागत किया। इस अवसर पर प्रत्येक संकाय सदस्यों और अधिकारियों ने आईआईएमसी में अंग्रेजी पत्रकारिता, हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के नए बैच के साथ अपनी जिम्मेदारियां साझा कीं। इस सत्र का संचालन सहायक प्रोफेसर और सत्रारंभ कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. विनीत उत्पल ने किया.

वहीं, संजय खजुरिया ने बताया कि दूरदर्शन के शुरुआती दौर में जब सैटेलाइट की सुविधा हमारे देश में नहीं थी तब सिंगापुर के सहयोग से हम प्रसारण करते थे। रेडियो और दूरदर्शन देखने के लिए भी लाइसेंस की आवश्यकता पड़ती थी। पत्रकारिता के गिरते स्तर पर उन्होंने कहा कि ईमानदारी और निष्ठा से ही इसका उत्थान होगा। मीडिया साक्षरता की जरूरत आज सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि सन् 2044 तक अखबारों का चलन खत्म हो जाएगा।
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दूसरे सत्र में विद्यार्थियों और प्राध्यापकों का एक दूसरे से परिचय के साथ ही उन्हें पाठ्यक्रम की भी जानकारी दी गई। मंच संचालन डॉ दिलीप कुमार ने की। इस दौरान प्राध्यापकों में डॉ अंशुला गर्ग, यासिर अराफात, डॉ विनीत कुमार, रवि कुमार के साथ संस्थान के सभी विद्यार्थी मौजूद रहे।
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