अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश के विशेष दर्जे की बहाली के लिए छह दलों की गुपकार गठबंधन की दीवारें दरकनी शुरू हो गईं हैं। गठबंधन में शामिल सज्जाद गनी लोन के नेतृत्व वाले पीपुल्स कांफ्रेंस ने नाता तोड़ लिया है। इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन के प्रवक्ता पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
गठबंधन छोड़ने के लिए उन्होंने डीडीसी चुनाव में गठबंधन के सहयोगियों की ओर से प्रॉक्सी उम्मीदवार खड़े कर विश्वास की हत्या करने को जिम्मेदार ठहराया है। सहयोगियों के बीच विश्वास टूटा है जो इलाज से इतर है। पार्टी के ज्यादातर लोगों का मत है कि चीजों के और बिगड़ने से पहले गठबंधन से किनारा कर लिया जाए।
गठबंधन से अलग होने का फैसला पीपुल्स कांफ्रेंस कार्यकारिणी की हुई बैठक में किया गया। कार्यकारिणी के फैसले की गठबंधन के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला को पत्र लिखकर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह सच है कि गुपकार गठबंधन ने इस चुनाव में स्पष्ट रूप से सबसे अधिक सीटों पर जीत दर्ज की।
हम आंकड़ों को छिपा नहीं सकते हैं। गुपकार गठबंधन द्वारा जीती गईं सीटों के अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि पांच अगस्त (अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निष्क्रिय करने) के संदर्भ में गुपकार गठबंधन के खिलाफ डाले गए वोट हैं।
इस पत्र को मीडिया में भी साझा करते हुए लोन ने कहा कि उनका मानना है कि गुपकार गठबंधन के खिलाफ किए गए मतदान में अधिकतर गठबंधन के घटकों के प्रॉक्सी उम्मीदवारों द्वारा आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ डाले गए मत हैं। गुपकार गठबंधन के पक्ष और विपक्ष में हुए चुनिंदा मतदान का नतीजा बहुत खराब मत प्रतिशत रहा।
यह वह मत प्रतिशत नहीं है जिसकी जम्मू-कश्मीर की जनता पांच अगस्त के बाद हकदार थी। पत्र में उन्होंने यह भी कहा है कि जनता ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई देखना चाहती है। वह हमारी कार्रवाई के प्रत्यक्षदर्शी हैं। वह हमारी ओर से लिखी गई राजनीतिक पटकथा के पात्र हैं और हम सोचते हैं कि जनता कुछ भी नहीं जानती है।
लोग जानते हैं कि सत्ता के लालच में अंधे होकर एक दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे गए। वे सवाल कर रहे हैं कि डीडीसी सीट पर यदि गठबंधन अध्यक्ष पर विश्वास नहीं किया जा सकता है तो कैसे बड़े मुद्दों पर भरोसा किया जा सकता है।
कश्मीर में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे, न कि पांच अगस्त के जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध
लोन ने कहा कि कश्मीर में हम एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे, न कि पांच अगस्त के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ। भाजपा और उसके सहयोगियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि जिन लोगों ने पांच अगस्त को रचा वे आज खुलेआम बोल रहे हैं। कहा कि ऐसे हालात में यह सोचकर कि कुछ भी नहीं हुआ, बने रहना मुश्किल है।
गठबंधन से लिया है तलाक, न कि उसके उद्देश्यों से
अलगाववादी खेमा छोड़कर 2009 में मुख्यधारा में शामिल होने वाले लोन ने कहा कि उनकी पार्टी ने गठबंधन से तलाक लिया है, न कि इसके उद्देश्यों से। उन्होंने गठबंधन नेतृत्व को आश्वस्त किया है कि जिन उद्देश्यों को लेकर इसका गठन किया गया था, उसे वह पूरा समर्थन देते रहेंगे।
पीपुल्स कांफ्रेंस ने जीती थीं आठ सीटें
डीडीसी चुनाव में गुपकार गठबंधन ने 280 सीटों में से 112 में जीत दर्ज की थी। पीपुल्स कांफ्रेंस ने दस सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे, जिसमें से आठ पर उसे जीत हासिल हुई।
कई सहयोगियों ने गठबंधन के औचित्य पर उठाए थे सवाल
डीडीसी चुनाव के बाद गठबंधन के कई सहयोगियों ने इसके औचित्य पर सवाल उठाए थे। नेशनल कांफ्रें स के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बशारत बुखारी ने गठबंधन के एजेंडे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए चुनाव के बाद एलायंस को अपना रोड मैप स्पष्ट करना चाहिए। उसके बिना तो गुपकार गठबंधन एक और हुर्रियत कॉन्फ्रें स बनकर रह जाएगा।
पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता व पूर्व मंत्री अब्दुल गनी वकील ने भी कहा था कि अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए हमें कश्मीर घाटी से पूर्ण समर्थन की उम्मीद थी। लेकिन आपसी लड़ाई की वजह से यह संभव नहीं हो पाया। इस भितरघात के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। एक और पूर्व मंत्री एवं पीपुल्स कांफ्रेंस के महासचिव इमरान रजा अंसारी ने भी चुनाव में भितरघात, प्रॉक्सी उम्मीदवारों को खड़ा करने तथा अपेक्षित सफलता न मिलने के कारणों की जांच की मांग उठाई थी। उन्होंने पूरे प्रकरण पर विचार करने के लिए कार्यकारिणी की बैठक बुलाने की भी मांग की थी।