घाटी में सेना की 15 कोर द्वारा ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय एकता यात्रा पर गईं 30 छात्राएं बुधवार को घाटी वापस लौंटी। अलगाववादियों द्वारा इस टूर का विरोध करने पर छात्राओं ने कहा कि उन्होंने टूर पर जाकर कुछ गलत नहीं किया, इसलिए वो क्यों किसी से डरें।
छात्राओं ने टूर का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे अपने आप को खुशकिस्मत मानती हैं कि वे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी जैसी हस्तियों से मिलीं। उन्होंने बताया कि इस दौरे के दौरान उन्होंने संसद के अलावा देश के विभिन्न संग्रहालयों में पुराने स्मारकों को देखा।
जिससे उनका मनोबल बढ़ा और उनके दृष्टिकोण में विस्तार हुआ है। टूर से वापस लौटी छात्रा सनोबर खान ने सेना का धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार जवाहर टनल को देखा। उन्होंने कहा कि इस टूर से हमें स्वतंत्रता की भावना का एहसास हुआ और अपने भविष्य के बारे में सोचने के लिए भी मदद मिली।
शैक्षिक टूर का विरोध करना गलत है
वहीं एक और छात्रा फौजिया यूसुफ ने बताया कि राष्ट्रपति और एचआरडी मंत्री ने टूर पर उन्हें भेजने के लिए उनके अभिभावकों की सराहना की। वहीं छात्रा राबिया ने कहा कि हमने सुना था कि हमारे बारे में जो गलत टिप्पणियां की जा रही हैं लेकिन वापस लौटने पर ऐसा कुछ नहीं लगा। हमने कोई गलत कार्य टूर पर जाकर नहीं किया तो हम क्यों फिर किसी से डरें।
टूर पर छात्राओं के साथ गई शिक्षक शबनम गुरेजी ने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि जब कोई किसी चीज से कुछ सीखे तो किसी को उस चीज से ऐतराज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शैक्षिक टूर का विरोध करना गलत है।
वहीं लैगिंग इन कार्यक्रम पर पहुंचे सीईओ आरिफ अहमद ने कहा कि छात्रों को स्कूली शिक्षा के अलावा भी अन्य चीजों को सीखना चाहिए। टूर पर गई छात्रों को यह पल हमेशा याद रहेगा।
कुछ लड़कियों के डांस का वीडियो हुआ वायरल
कश्मीरी छात्राओं को सेना के दौरे पर भेजने के बाद अलगाववादियों द्वारा हुई आलोचना और सैन्य कर्मियों के साथ कुछ लड़कियों के डांस का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल नेटवर्किगिं साइट्स पर एक नफरत अभियान शुरू होने पर जवाब देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने कहा कि इस टूर की कुछ आनलाइन आलोचना हुई है।
उन्होंने कहा कि भारत एक आजाद मुल्क है और सभी को अपनी यहां अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। दुआ ने कहा जहां तक अलगाववादियों की धमकियों और सोशल मीडिया पर आलोचना की बात है तो यह यात्रा शिक्षा विभाग के साथ साथ छात्राओं के अभिभावकों की सहमति से आयोजित की गई थी।
उन्होंने बताया कि सेना के पास 80 छात्राओं की सूची थी, जिसमें 30 को टूर पर ले जाया गया, जो इस टूर पर नहीं जा सकी उनमें काफी निराशा थी।
उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सेना कभी भी एक्टिव कैंपेन के जरिये अलगाववादियों को काउंटर करने का सोचेगी भी नहीं। सेना वो करती रहेगी जो उसे करना है।