स्थानीय लोग निभा रहे जिम्मेदारी, जानवरों और खेती की देखरेख भी जारी
यातायात की सीमित सुविधाओं के बावजूद ग्रामीणों ने संयम नहीं खोया। कई लोग पैदल ही अपने परिवारों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़े। वीरवार सुबह कुछ ग्रामीण वापस अपने घरों पर लौटे और प्राथमिकता के आधार पर जानवरों के लिए चारे-पानी का इंतजाम किया, साथ ही खेतों से जुड़े जरूरी कार्य भी पूरे किए। घरों की साफ-सफाई और देखरेख के बाद वे दोपहर बाद पुनः सुरक्षित शिविरों की ओर रवाना हो गए। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अस्थायी शिविरों में ही रुके हुए हैं, जहां प्रशासन की ओर से सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
बाजारों में शांति, जरूरी सेवाएं चालू
अरनिया बाजार में हालात सामान्य बनाए रखने की दिशा में प्रयास जारी हैं। दूसरी ओर, जरूरी सेवाएं जैसे किराना और स्वास्थ्य संबंधी दुकानें सीमित रूप से खुली हैं, ताकि लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी की जा सकें।
पशुओं और खेतों की रक्षा में भी दिखी सूझबूझ
पंचायत तरेबा की पूर्व सरपंच बलबीर कौर ने बताया कि जानवरों को घरों में सुरक्षित रखना ही बेहतर है। उन्होंने कहा कि यदि किसी आपात स्थिति में आगजनी हो, तो पशु खुद को बचा सकें, इसके लिए उनकी रस्सियां खोल दी गई हैं।
कृषि कार्यों पर आंशिक असर, किसान फिर भी हिम्मत से डटे
सीमा पर तनाव का असर खेती पर भी पड़ा है। प्रवासी श्रमिकों के अस्थायी रूप से लौटने के कारण धान की पनीरी और सब्जियों की कटाई जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसान बसंत सिंह सैनी जो सात एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि फसल तैयार है, लेकिन मजदूरों की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। इसके बावजूद वे उम्मीद और साहस के साथ स्थिति का सामना कर रहे हैं।