सांबा में गर्भवती महिला ने मार्ग किनारे बच्ची को दिया जन्म। संवाद
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सांबा। जिला अस्पताल में रविवार को डॉक्टरों की घोर लापरवाही सामने आई है। यहां सुबह प्रसव के लिए पहुंची गर्भवती को डॉक्टरों ने यह कहते हुए वापस लौटा दिया कि पहले कोरोना टेस्ट करवाकर आओ। प्रसव पीड़ा बढ़ने पर गर्भवती ने सड़क किनारे ही एक मेडिकल स्टोर के बाहर बच्ची को जन्म दे दिया।
जानकारी के अनुसार प्रवासी मजदूर धर्मेंद्र सुबह पत्नी को प्रसव के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन यहां डॉक्टरों ने उसे पहले घगवाल या जम्मू जाकर कोरोना जांच करवाने को कहा। आरोप है कि इसके लिए गर्भवती महिला को एंबुलेंस भी नहीं दी गई। कुछ देर बाद सांबा में ही एक हाईवे किनारे मेडिकल स्टोर के पास उसने बच्ची को जन्म दे दिया। सड़क पर ही प्रसव की सूचना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के निर्देश पर बाद में नर्स के साथ मौके पर एंबुलेंस भेजी गई और महिला के साथ नवजात को अस्पताल में शिफ्ट किया गया। धर्मेंद्र ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंचे तो उसकी पत्नी काफी तकलीफ में थी। उन्होंने डॉक्टरों को कहा कि उसे भर्ती कर लें, लेकिन उन्हें जम्मू भेज दिया गया, एंबुलेंस न मिलने के कारण उन्हें घर लौटना पड़ा। इसी बीच हाईवे के किनारे उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा बढ़ गई और वह एक मेडिकल स्टोर के पास लेट गई। पति ने बताया कि उसने पत्नी को चादर दे दी, वहां पर ही उसने बच्ची को जन्म दिया।
एक घंटे बाद नर्स के साथ भेजी गई एंबुलेंस
एक घंटे के बाद एंबुलेंस वहां पहुंची, एक नर्स के साथ उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। उधर, जिला अस्पताल के इंमरजेंसी में तैनात डॉक्टर अनिल कुमार के अनुसार मरीज के साथ आए तीमारदार को कहा गया कि उन्हें कोविड जांच करवाने के लिए जम्मू रेफर करना है। 108 एंबुलेंस के लिए भी फोन किया था, लेकिन वे लोग बिना बताए घर चले गए। बाद में उन्हें पता चला कि महिला ने बच्ची को जन्म दिया है। उन्होंने नर्स के साथ एंबुलेंस भेजी। अब महिला और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। जानकारी के अनुसार धर्मेंद्र छत्तीसगढ़ का रहने वाला है और वह सांबा में एक फैक्ट्री में काम करता है।