कन्याकुमारी से शुरू हुई मोरारी बापू की स्वस्तिक रामकथा यात्रा मंगलवार को जम्मू पहुंची। दक्षिण से उत्तर भारत तक आठ राज्यों के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों से गुजर रही यात्रा ने देश की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने का संदेश दिया। यात्रा में आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली, शक्तिपीठ, श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और गुरु परंपरा से जुड़े स्थलों को शामिल किया गया था।
यात्रा के व्यवस्थापक दिलीप राठौर और नटवर भाई शाह ने बताया कि 10 अक्तूबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई यात्रा केरल के कालड़ी, कर्नाटक के शृंगेरी और हम्पी, महाराष्ट्र के तुलजा भवानी शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश के झांसी, उत्तर प्रदेश के मथुरा, हरियाणा के कुरुक्षेत्र और पंजाब के अटारी से होते हुए जम्मू पहुंची।
जम्मू-कश्मीर की आध्यात्मिक विरासत का किया उल्लेख
रामकथा के दौरान मोरारी बापू ने शंकराचार्य परंपरा व कश्यप ऋषि से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख करते हुए जम्मू-कश्मीर की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया। कुरुक्षेत्र में अपनी बात दोहराते हुए कहा, कश्मीर केदारनाथ का है और सदा रहेगा।
चार संस्कारों पर आधारित है यात्रा का संदेश
मोरारी बापू ने स्वस्तिक रामकथा यात्रा को चार सूत्रों - मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव और अतिथि देवो भव पर आधारित बताया।