जम्मू कश्मीर में जमानत पर रिहा होने वाले आतंक से जुड़े आरोपियों की ट्रैकिंग अब जीपीएस एंकलेट से की जाएगी। हाल ही में उधमपुर के आरोपी गुलाम अहमद भट पर इसका इस्तेमाल किया गया। ऐसा करने वाला जम्मू कश्मीर देश का यह पहला प्रदेश बन गया है। जम्मू कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन ने इसके इस्तेमाल की वजह बताई है।
डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि पहला ट्रैकर जिस आरोपी पर लगाया गया है। वह आतंकवादी और अलगाववादी वित्तपोषण के लिए एक सिलेंडर में 50 लाख रुपये ले जा रहा था। ट्रैकर के माध्यम से, हम न्यायालय के आदेशों के बाद उसकी गतिविधियों और जमानत की शर्तों की निगरानी कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि इसे समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कानूनी संदर्भ और परिचालन संदर्भ एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। परिचालन संदर्भ यह है कि जो लोग बार-बार अपराध करते हैं, चाहे वह आतंकवाद हो, नशीले पदार्थों के तस्कर हो या किसी प्रकार के अन्य जघन्य अपराध में शामिल हो। आरोपियों को जमानत इस शर्त पर दी जाती है कि वे कोई दूसरा अपराध नहीं करेंगे। आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और गवाहों का बदला नहीं लेंगे। कानून इस भरोसे के आधार पर जमानत की अनुमति देता है। इसका मतलब यह नहीं है कि केस समाप्त हो गया है।