जम्मू-कश्मीर सरकार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि जेके बैंक में बड़ा बदलाव आने वाले कुछ दिनों में देखने को मिलेगा। राज्यपाल ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा था कि जेके बैंक पर हमने किसी भ्रष्टाचार के बुनियाद पर नहीं बल्कि आरबीआई के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की है। आगे आपको ऐसी चीजें देखने को मिलेंगी जो आपने सोची नहीं होंगी। राज्यपाल के बयान के दो दिन बाद ही जेके बैंक को आरटीआई के दायरे में लाने के साथ सीवीसी गाइडलाइन को लागू करने का फैसला लिया गया।
दरअसल राज्य प्रशासन ने यह साफ किया था कि जेके बैंक को आरटीआई के दायरे में लाया जाएगा, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। यह नहीं होगा कि किसी के बैंक के खाते की जानकारी मांगी जाए और वह दे दिया जाए। बैंक को आरटीआई के दायरे में लाने के मुद्दे पर विधानसभा में भी हंगामा हो चुका है। सत्ता में रहते हुए भाजपा के सदस्यों ने ही इसे आरटीआई के दायरे में लाने की मांग की थी। आरटीआई से बैंक की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।
साथ ही यह पता लग सकेगा कि बैंक का पैसा कहां जा रहा है। इसके साथ ही सीवीसी गाइडलाइन के लागू होने से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। अब भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच हो सकेगी। साथ ही चार्जशीट भी पेश किया जा सकेगा। ज्ञात हो कि एंटी करप्शन ब्यूरो ने पीडीपी-भाजपा सरकार में हुई 1200 नियुक्तियों में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की मिली शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया था। इसके साथ ही बैंक मुख्यालय में छापेमारी कर नियुक्तियों से संबंधित रिकार्ड खंगाले थे। 100 से अधिक फाइलों को जब्त करने के साथ ही डिजिटल सबूत भी एकत्र किए थे।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जेके बैंक के खिलाफ आरबीआई के निर्देशों पर कार्रवाई की गई है। रिजर्व बैंक ने बैंक की चिंताओं के संबंध में पत्र लिखा था। हम भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टालरेंस पर काम कर रहे हैं। बेहतर प्रशासन के लिए यह कार्रवाई की गई। मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा था कि यह बैंक का काम नहीं है कि वह नौकरी दे बल्कि उसका काम लोगों के पैसे की सुरक्षा करना है। कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत 50 करोड़ गोल्फ कोर्स पर खर्च कर दिया गया। गोल्फ कितने लोग खेलते हैं। जेके बैंक की किसी भी कीमत पर रक्षा की जाएगी। बैंक तीन महीने में भ्रष्टाचार मुक्त होगा और अपने पुराने वैभव को प्राप्त करेगा।
पीएसयू बनाने के प्रस्ताव का हुआ था विरोध
स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव कौंसिल (एसएसी) ने गत वर्ष नवंबर में जेके बैंक को पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। साथ ही प्रस्ताव में बैंक को राज्य विधानसभा के प्रति जिम्मेदार बनाया गया था। इस प्रस्ताव का बैंक कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर भारी विरोध किया था। कर्मचारियों के भारी विरोध को देखते हुए गत वर्ष चार दिसंबर को राज्यपाल ने कहा था कि विधानसभा के प्रति जिम्मेदार बनाए जाने के मामले का दोबारा परीक्षण किया जाएगा।