राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो को आतंकवाद निरोधक अभियानों में लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। साफ किया कि यह विशेष प्रशिक्षित फोर्स केवल गंभीर तथा खराब हालात में ही लगाई जाएगी। आतंकवाद निरोधक अभियानों में पुलिस, सेना तता सीआरपीएफ बेहतर काम कर रही है। इस वजह से एनएसजी को इसमें लगाने की आवश्यकता नहीं है। वे एक न्यूज एजेंसी से बात कर रहे थे।
राज्यपाल ने यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष एनएसजी की तैनाती का कोई प्रस्ताव है तो उन्होंने कहा कि हाल ही में एनएसजी प्रमुख ने उनसे मुलाकात की थी। एनएसजी को आतंकवाद निरोधक अभियानों में लगाने की बात सरासर गलत है। वह पूरी तरह आश्वस्त हैं कि ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है जिसमें इस विशेष प्रशिक्षित फोर्स की जरूरत पड़े। यदि कभी हालात गंभीर से गंभीर होते हैं तो केंद्र की सलाह से एनएसजी से आग्रह किया जा सकता है।
यह पूछे जाने पर कि घाटी में कुछ एनएसजी कमांडो की तैनाती की गई है तो राज्यपाल ने कहा कि वे ट्रेनिंग के लिए आए हैं। पुलिस को भी ट्रेनिंग दी जा रही है, लेकिन आतंकवाद निरोधक अभियानों में उनकी कोई भूमिका नहीं है। ज्ञात हो कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में तेलंगाना में एनएसजी के एक कार्यक्रम में कहा था कि सरकार योजना बना रही है कि देश में सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एनएसजी का कैसे इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि एनएसजी कमांडो की आतंकियों की ओर से लोगों को बंधक बनाए जाने के मामले में बड़ी भूमिका रही है।
केंद्र कश्मीर में भी बढ़ती आतंकी घटनाओं की वजह से एनएसजी की तैनाती पर विचार कर रही है। एनएसजी 26/11 के मुंबई हमले, जनवरी 2016 के पठानकोट एयर बेस हमले तथा गुजरात के अक्षरधाम मंदिर हमले में भूमिका निभा चुकी है।