जम्मू कश्मीर विधानसभा के त्रिशंकु नतीजों के बाद सियासी पार्टियों में शह और मात के अठारह दिनों तक चले सियासी ड्रामे का राज्यपाल शासन लागू होने के साथ पटाक्षेप हो गया।
राज्यपाल शासन के लागू होने के साथ ही सियासी दलों में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है। राज्यपाल शासन लागू होने की आड़ में सियासी दल अपने सियासी मकसद साधने में भी लग गए है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज का कहना है कि राज्यपाल शासन लगने के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी सीधे तौर पर जिम्मेवार है। सोज की माने तो कांग्रेस ने पीडीपी को सरकार बनाने के लिए बिना शर्त समर्थन दिया था।
स्थायी सरकार के लिए कई निर्दलीय विधायक भी समर्थन के लिए तैयार थे। स्थायी सरकार के लिए ओर क्या चाहिए था लेकिन पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कांग्रेस के बजाये भाजपा के नजदीक जाना बदकिस्मत से बेहतर समझा।
पीडीपी अगर कांग्रेस के साथ जाती तो राज्यपाल शासन की नौबत नहीं थी।