मलिक ने कहा कि घाटी में पाकिस्तान के 100-125 आतंकी सक्रिय हैं। मुठभेड़ के दौरान इन्हें खत्म करने में दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि स्थानीय आतंकी तुरंत मर जाते हैं। इनके पास अच्छे हथियार भी नहीं होते हैं। अब इन्हें न तो आजादी और न ही आटोनॉमी के नाम पर भड़काया जा रहा है क्योंकि पता है कि ये दोनों चीजें मिलने वाली नहीं हैं। अब इन्हें जन्नत मिलने के नाम पर भड़काया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में दो जन्नत है। एक तो यहां की वादियां खुद ही जन्नत का अहसास कराती है दूसरी यहां विकास के बल पर जन्नत। उन्होंने आतंकवादियों से हिंसा का रास्ता नहीं अपनाने को कहा।
कश्मीर के बदल रहे माहौल को आगे ले जाना है
राज्यपाल ने कहा कि कश्मीर का माहौल बदल रहा है। लोगों का स्वभाव बदला है। अब लोग समझदारी तथा आपसदारी की बात कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने कश्मीरी पंडितों को घाटी में बुलाने की बात की तो हुर्रियत प्रमुख ने भी कहा कि पंडितों को दोबारा घाटी में बुलाया जाना चाहिए। इस माहौल को आगे ले जाना है। साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई भी जारी रखनी है।
राज्यपाल ने कहा कि भ्रष्टाचारियों से रोजाना लड़ाई होती है। लेकिन किस-किस से लड़ूं। एक दिन लड़ते-लड़ते वह बीमार हो जाएंगे। निवेदन किया कि जनता को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रेशर बनाना चाहिए। इससे पहले उन्होंने कहा कि डल झील का डीपीआर आठ महीने में नहीं बन सका। इस पर उन्होंने एक दिन पहले विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी को चेताया कि 15 दिन में डीपीआर नहीं बना तो वह अपनी छुट्टी कर लें।
एक साल में बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं मिल पाई
राज्यपाल ने कहा कि एक सप्ताह बाद उनका एक साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस एक साल में उनके हिस्से में कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हाथ नहीं आई है। वजह भ्रष्टाचार है। इसमें शामिल अफसर धमकियां तक देते हैं।
उमर ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक पद धारण करने वाला एक जिम्मेदार व्यक्ति आतंकियों को भ्रष्ट नेताओं की हत्या करने को कह रहा है। इस प्रकार की गैरकानूनी हत्याओं तथा कंगारू कोर्ट की अनुमति देने से पहले कम से कम उन्हें अपने पद की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए।