रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि कश्मीर समस्या का समाधान हर हाल में होकर रहेगा। दुनिया की कोई ताकत इसे रोक नहीं सकती है। यदि बातचीत से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है तो हम इस समस्या के समाधान की कला जानते हैं।
कुछ तत्वों की कोशिश रहती है कि कश्मीर का विकास न हो। यहां भाईचारा तार-तार हो जाए। वे कठुआ में उज्ज तथा सांबा जिले में बसंतर नदी पर बने पुल राष्ट्र को समर्पित करने के बाद आयोजित समारोह में बोल रहे थे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर हमारे दिल में बसा है। वह जो कुछ बोलते हैं, सोच समझकर बोलते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी ताकते हैं, जिन्हें समझ नहीं आता है।
गृहमंत्री रहते हुए बार-बार अपील की गई कि बैठ कर इस समस्या का समाधान निकाला जाए। शालीनता और विनम्रता के साथ कई बार कहा गया कि जो लोग कश्मीर को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उसके माध्यम से कश्मीर का समाधान चाहते हैं वे एक बार बैठ कर बात तो करें। आखिर मुद्दा क्या है ?
समस्या क्या है, ताकि मिल बैठकर सुलझाया जाए। जितनी अपील कश्मीर के तथाकथित नेताओं से की गई, पहले किसी ने नहीं की। उस समय की मुख्यमंत्री महबूबा को भी कहा गया कि पहल करें। सर्वदलीय डेलीगेशन लेकर आए और बातचीत की कोशिश की गई। डेलीगेशन में शामिल शरद यादव और दो-तीन नेता मिलने भी गए, लेकिन उन्होंने बात नहीं की।
वह लोग जो बार-बार आजादी की रट लगाते हैं वह आज तक नहीं बता पाए कि कैसी आजादी चाहिए। क्या पाकिस्तान की तरह आजादी चाहिए जिसे कोई भी कबूल नहीं करेगा। केंद्र सरकार ऐसे हालात पैदा करना चाहती है कि जो केवल जम्मू-कश्मीर के नहीं बल्कि भारत का भविष्य हैं, उनका भविष्य उज्ज्वल हो। इसे भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया की जन्नत बनाना चाहते हैं जहां दुनियाभर से पर्यटक आएं।