जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हुर्रियत तथा मुख्यधारा की पार्टियों पर हमला करते हुए कहा कि हुर्रियत, मुख्यधारा की पार्टियों, धार्मिक उपदेशकों और मौलवियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल आम कश्मीरियों के बच्चों को मरवाने में किया। इनमें से किसी ने भी आतंकवाद की वजह से अपनों को नहीं खोया। उनके परिवार में से कोई भी आतंकवाद से नहीं जुड़ा।
राज्यपाल ने आरोप लगाया कि प्रभावी और शक्तिशाली तबकों ने कश्मीरी युवाओं के सपने और उनकी जिंदगियों को तबाह कर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह इस सच्चाई को समझें और राज्य में शांति और समृद्धि लाने के केंद्र सरकार के प्रयासों में शामिल हो जाएं। वे मंगलवार को कटड़ा में श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इन सभी के अपने बच्चों का करियर अच्छा चल रहा है। सभी विदेश में पढ़ रहे हैं। लेकिन आम कश्मीरी व्यक्ति के बच्चों को बताया गया कि स्वर्ग का रास्ता मारे जाने में है। नेता, नौकरशाह, प्रभावी और शक्तिशाली लोगों ने युवाओं के सपने और उनके जीवन को बर्बाद कर दिया। कहा कि राज्यपाल बनने के बाद मैंने खुफि या एजेंसियों से कोई इनपुट नहीं लिया। वे दिल्ली या हमें सच नहीं बताते हैं।
मैंने सीधे तौर पर 150 से 200 कश्मीरी युवाओं से बात की और कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में उन्हें पहचानने की कोशिश की जो राष्ट्रगान पर खड़े नहीं होते हैं। मैंने उनसे और 25 से 30 साल के आयु वर्ग वाले उन लोगों से बात की जिनके सपने कुचल दिए गए। वे भ्रमित हैं और गुस्से में हैं। वे न तो हुर्रियत चाहते हैं, न हमें चाहते हैं और न केंद्र सरकार को या स्वायत्तता को क्योंकि उन्हें बताया गया है कि स्वर्ग जाने का रास्ता मरने में है। मैंने ऐसे युवाओं से कहा कि उनके पास कश्मीर में पहले से ही स्वर्ग है।
उन्होंने दिग्भ्रमित युवाओं से कहा कि उन्हें दो जन्नत मिल सकती है। हालांकि, यह उनका धार्मिक मामला है जिस पर वह नहीं बोलना चाहते। लेकिन वह उन्हें दो जन्नत देने को तैयार हैं। एक यहां रहते हुए और दूसरा मरने के बाद। जहांगीर ने कश्मीर को जन्नत बताया था। इस वजह से यहां रहने वाले को जन्नत नसीब है। यदि सच्चे मुसलमान के रूप में मरे तो निश्चित रूप से दूसरा जन्नत मिलेगा।
धन का सही इस्तेमाल होता तो छतें सोने की बन गईं होतीं
राज्यपाल ने कहा कि 22 हजार कश्मीरी युवा राज्य से बाहर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। आखिर उन्हें शिक्षा के लिए राज्य से बाहर क्यों जाना पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम पिछले कई दशकों से राज्य में मानक शिक्षा छात्रों को मुहैया नहीं करा पाए हैं। कश्मीर में भेजे गए धन का इस्तेमाल अगर नेता और नौकरशाह सही तरीके से करते तो आपके घरों की छतें सोने की बन गई होतीं।