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जम्मू कश्मीर: जेकेपीसीसी के पूर्व डीजीएम की 2.60 करोड़ की संपत्ति पर अब सरकार का हक, ईडी ने दर्ज किया था केस

Thu, 01 Sep 2022 03:01 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

पूर्व डीजीएम के सांबा में फार्म हाउस, जम्मू में प्लॉट और नोएडा में फ्लैट की खरीद में कालेधन का इस्तेमाल पाया गया। सुरेश रेखी जम्मू-कश्मीर के पहले ऐसे सरकारी अफसर हैं, जिन पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। 2013 में सुरेश पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने बेनामी और आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था।
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जम्मू सचिवालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (जेकेपीसीसी) के पूर्व उप महाप्रबंधक सुरेश रेखी की ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा की अटैच की गई संपत्ति पर अब सरकार का हक है। प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के न्याय निर्णायक प्राधिकारी नई दिल्ली ने संपत्ति को अटैच करने की मंजूरी दे दी है।

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पूर्व डीजीएम के सांबा में फार्म हाउस, जम्मू में प्लॉट और नोएडा में फ्लैट की खरीद में कालेधन का इस्तेमाल पाया गया। सुरेश रेखी जम्मू-कश्मीर के पहले ऐसे सरकारी अफसर हैं, जिन पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। 2013 में सुरेश पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने बेनामी और आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। तब एसीबी ने जांच में पाया था कि आरोपी सुरेश ने अपनी पत्नी कुमुद रेखी के साथ मिलकर 3,82,74,730 रुपये की संपत्ति बनाई, जोकि अवैध रूप से कमाई गई।

एसीबी ने इस मामले में 2018 में अदालत में आरोपपत्र भी दायर किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने इसे लेकर काले धन में मामला दर्ज किया और आरोपी की संपत्ति अटैच की थी। अटैच संपत्ति में सांबा जिले के गांव तरोर में 8 कनाल 10 मरला पर बना फार्म हाउस, इसमें दो कनाल सतीश कुमार अंडोत्रा और 2 कनाल जमीन कुमुद रेखी के नाम पर है।
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इसकी कीमत 1,57,63,000 रुपये है। इसके अलावा छन्नी हिम्मत जम्मू में भल्ला एनक्लेव में एक कनाल 2 मरला का प्लाट (कीमत 44,00,000 रुपये) और नोएडा के जेपी ग्रीन सेक्टर 128 में फ्लैट नंबर पीवीसी 0091104, जिसकी कीमत 59,15,550 रुपये है, को भी अटैच किया है।

आरोपी ने यह संपत्ति 1991 से लेकर 2013 तक बनाई। एसीबी की ओर से आरोपपत्र दायर करने के बाद वर्ष 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने सुरेश रेखी और कुमुद रेखी के खिलाफ कालेधन की रोक संबंधित धारा में केस दर्ज किया था।

निदेशालय ने अपनी जांच में पाया कि आरोपी धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 में संलिप्त है। जांच में आरोपी की 2,60,78,550 रुपये की संपत्ति कालेधन में शामिल पाई गई। इसके बाद इसे अटैच किया गया। 25 अगस्त 2022 को पीएमएलए के न्याय निर्णायक प्राधिकारी नई दिल्ली ने इसे अटैच करने को मंजूरी दी। अब यह संपत्ति सरकार की होगी।

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