सीएम महबूबा मुफ्ती और डिप्टी सीएम निर्मल सिंह
- फोटो : Amar Ujala
रियासत की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने कहा है कि वह कश्मीरी पंडितों की घाटी में ससम्मान वापसी के लिए संकल्पित है। यदि अलगाववादियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों को इसमें किसी प्रकार की आपत्ति है तो वह उनसे डिबेट करने को तैयार है।
सरकार ने अपील की है कि यदि अलगाववादियों तथा अन्य राजनीतिक दलों को उनकी वापसी के संबंध में किसी प्रकार की आपत्ति है तो वह अपने सुझाव दे सकते हैं कि इस दिशा में कैसे आगे बढ़ा जाए।
सरकार के प्रवक्ता तथा शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर खुली बहस को तैयार है। वह कश्मीरी पंडितों की वापसी के संबंध में सर्वसम्मति बनाना चाहती है। कश्मीरी पंडितों के लिए कंपोजिट टाउनशिप को लेकर कहा कि हमें तो कश्मीरी पंडितों को वापस बसाने को लेकर खुश होना चाहिए। हमारा भी वही मुद्दा है जो गिलानी साहब का है।
जैसे वह कश्मीरी पंडितों को समाज का हिस्सा मानते हैं वैसे ही हम भी मानते हैं। अगर वह 20-25 वर्षों के बाद लौटते हैं तो आखिर कहां जाएंगे ? नईम के अनुसार वे पूरी तरह से बदले हुए परिदृश्य में वापस आ रहे हैं। हम केवल उन्हें जमीन उपलब्ध करवाएंगे जहां न केवल कश्मीरी पंडित बल्कि राज्य का कोई भी शख्स आकर रह सकेगा।
एक्सक्लूसिव कॉलोनियां हमारे एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अलगाववादियों के पास अगर कोई सुझाव है तो वह सामने रखें। हमने अपने पत्ते खोल दिए हैं वह अपने पत्ते खोलें। वह खुद कश्मीरी पंडितों के लिए कश्मीर वापसी के अभियान का नेतृत्व करें।