राज्य विधानसभा में सरकार को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। शून्यकाल के दौरान सदन में मंत्रियों के मौजूद न रहने पर पीडीपी-भाजपा सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ा।
हालांकि, सदन में मौजूद पीडीपी के एक मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार की तरफ से वे उनकी बात सुन रहे हैं, लेकिन सदस्य शोर शराबा करते रहे।
प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद सदन से लगभग सभी मंत्री निकल गए थे। शून्य काल शुरू होते ही अध्यक्ष पीठ पर चेयरमैन पैनल के चौधरी शामलाल बैठे थे। इस दौरान सदस्यों की ओर से प्रश्न किए जा रहे थे, लेकिन किसी मंत्री के न रहने से उन्हें जवाब नहीं मिल पा रहा था।
इस पर भाजपा सदस्यों रवींद्र रैणा सहित अन्य सदस्यों ने आपत्ति जताई कि सदन में न तो कोई मंत्री है और न ही अफसर। ऐसे में प्रश्न करने का क्या औचित्य है जब उसका जवाब ही नहीं मिलना है। इस पर सदन में मौजूद पीडीपी के एक मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार की ओर से वे मौजूद हैं और उनकी बातें सुनी जा रही हैं।
वे उनके प्रश्नों का जवाब भी दे सकते हैं। लेकिन सदस्य इससे सहमत नहीं हो पाए। इसी दौरान उद्योग मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा सदन में उपस्थित हो गए। धीरे-धीरे अन्य मंत्रियों के पहुंचने से सदस्यों का विरोध थमा।
सत्ताधारी दल के सदस्यों के विरोध जताने का सदन में मौजूद कांग्रेस के सदस्यों ने भी समर्थन किया।