यूटी बने लद्दाख में सरकारी तंत्र चलाना बड़ी चुनौती रहेगा। इसका कारण अलग-अलग विभागों में छह हजार से ज्यादा पद खाली होना है। इनमें से पीएचई और पीडीडी में 3500 के करीब पद खाली है। इन पदों को पहले चरण में भरने के लिए विभिन्न विभागों में अधिकारियों के लद्दाख में सेवाएं लेने बारे में राय ली गई थी। कर्मचारियों ने फॉर्म भरकर अपनी प्राथमिकता बताई है।
इसमें कश्मीर घाटी से संबंधित कर्मचारियों ने कश्मीर तो जम्मू संभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने जम्मू में ही सेवाएं देने की रुचि जाहिर की है। मौजूदा समय में लद्दाख में अलग-अलग विभागों में पद खाली चल रहे हैं। यूटी बनने के बाद खाली पदों को भरने की कवायद शुरू होनी है। इस प्रक्रिया को आगामी पांच से छह माह में पूरा किया जाना है। मगर काम चलाने के लिए जम्मू और कश्मीर से कर्मचारियों को व्यवस्था होने तक लद्दाख भेजा जाना है।
यहां पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों ने वापस अपने पुराने स्थानों पर सेवाएं देनी हैं। अब लद्दाख जाने से कर्मचारी तौबा कर रहे हैं। पीएचई में 1600 जबकि पीडीडी में 1900 पद खाली चल रहे हैं। पीएचई और पीडीडी में लाइनमैन से लेकर अधिकारियों तक के पद खाली हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार पहले हर साल लद्दाख में जेएंडके से ही कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती थीं। अब यूटी बनने के कारण कर्मचारी यहां जाने से मना कर रहे हैं। कर्मचारियों ने रुचि नहीं ली तो यूटी बने लद्दाख में कामकाज चलाना मुश्किल हो जाएगा। अन्य कार्यालयों में लद्दाख जाने के लिए कर्मचारियों ने स्थानीय जगहों में ही कामकाज करने में रुचि दिखाई है। लद्दाख में विपरीत परिस्थितियों के कारण भी कर्मचारी जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
लद्दाख में सेवाएं देने बारे फॉर्म कर्मचारियों को वितरित किए गए हैं। कर्मचारियों ने फॉर्म भरकर दे दिए हैं। कर्मचारी स्थानीय जगहों में ही सेवाएं देने में रुचि दिखा रहे हैं।- पीडी सिंह, एक्सईएन, पीडीडी