पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि भाजपा-पीडीपी सरकार झूठ और धोखे की बुनियाद पर खड़ी है। सरकार का न्यूनतम साझा कार्यक्रम झूठ का पुलिंदा है। भाजपा और पीडीपी का लक्ष्य किसी तरह सत्ता हासिल करना था और दोनों पार्टियां सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती हैं। पत्रकारों से बातचीत में उमर ने कहा कि सभी मुद्दों पर गठबंधन सरकार ने लोगों को भ्रम में रखा है।
अफस्पा, जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों की रिहाई और पावर प्रोजेक्टों की वापसी पर झूठे वादे किए गए और अब सच्चाई जनता के समाने आने लगी है। उमर ने कहा कि भाजपा-पीडीपी अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश कर रही है, लेकिन सच सामने आने लगा है। गठबंधन सरकार ने राज्यपाल के अभिभाषण और उससे पहले सीएमपी में जो मुद्दे शामिल किए, वह एक-एक कर झूठे साबित होने लगे हैं।
अफस्पा की वापसी को केंद्र ने खारिज कर दिया और अब बिजली प्रोजेक्टों की वापसी भी खारिज हो गई है। राजनीति बंदियों की रिहाई को पहले ही खारिज किया जा चुका है। बाढ़ पीडि़तों के लिए 44 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की मांग को भी केंद्र ने ठुकरा दिया।
रियासत के वित्त मंत्री ने भी उस मांग से दूरी बना ली। महज एक माह में सीएमपी के सभी महत्वपूर्ण मुद्दे खारिज कर दिए गए हैं। ऐसे में जनता की कौन सी उम्मीद पूरी हो सकेगी। सीएमपी को बनाने में तीन माह लगाए लेकिन उसे लागू नहीं किया जा रहा है।