वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग के लिए शुरू की दो दिवसीय हड़ताल का शनिवार को भी व्यापक असर देखने को मिला। ऑल जम्मू कश्मीर सर्व विभागीय लिपिक संघ की हड़ताल के कारण लोगों को भारी दिक्कतों से दो चार होना पड़ा।
दूर दराज से आए लोगों को बिना काम करवाए ही वापस लौटना पड़ा। वहीं सरकारी बाबुओं ने दूसरे दिन भी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
संघ की जिला इकाई के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए कहा कि एक विभाग को तरहीज देना और दूसरे को छोड़ना सही नहीं है। राज्य सरकार ने लेकिन ऐसा ही किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आश्वस्त किया था कि सभी विभागों के सरकारी बाबुओं की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं किया गया। छह सालों से वह वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार ने मात्र आश्वासन ही दिए हैं।
प्रदर्शनकारियों में शामिल सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार ने शुरू से ही क्लेरिकल स्टाफ के साथ भेदभाव किया है। हाल ही में पुलिस विभाग की विसंगतियों को दूर किया गया है लेकिन सरकार ने क्लेरिकल स्टाफ को फिर छोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पिछली बार हड़ताल की थी तो सरकार ने एक महीने के भीतर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया था लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी सरकार ने मांग को दरकिनार ही किया है।
उन्होंने कहा कि सांकेतिक हड़ताल शनिवार को समाप्त हो गई लेकिन अगर सरकारी ने आचार संहिता लगने से पूर्व मांग पूरी नहीं की तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर राम चंद शर्मा, जयपाल वर्मा, जियालाल गुप्ता, अनिल सिंह, गंगा राम शर्मा, पवन शर्मा, नवीन चंद्र खजूरिया, शिवकुमार, पुरुषोत्तम दास आदि मौजूद थे।