जम्मू। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में रविवार को इमरजेंसी सेवाएं बेपटरी हो रही हैं। दोपहर एक बजे अखनूर से एंबुलेंस में मरीज को लेकर तीमारदार पहुंचे। जब जांच करवाने के लिए इमरजेंसी ब्लॉक में गए तो न्यूरो सर्जन डॉ. सुखनैन की कुर्सी पर बैठे प्रशिक्षु छात्र ने सिर में ट्यूमर के उपचार की सुविधा न होने की बात कहकर उन्हें वापस भेज दिया। इमरजेंसी में सीएमओ का कार्यभार देख रहीं डाॅ. अनीता शर्मा ने ऐसी जानकारी न होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि न्यूरो सर्जन की ड्यूटी है और वे मरीज आने पर ऑनकाल उपलब्ध हैं।
इसी तरह डोडा के चूर्ण सिंह मरीज की जिंदगी बचाने के लिए ओ पॉजिटिव ग्रुप का खून लेने ब्लड बैंक के बाहर भटक रहे थे। दोपहर दो बजे थे और एक घंटे से उन्हें यह बताने वाला कोई नहीं मिला कि खून कैसे मिलेगा। परिचित को फोन करके खून उपलब्ध करवाने की मदद मांगते रहे। चूर्ण सिंह ने कहा कि यहां तो व्यवस्था बदहाल है। गरीब की सुनने वाला कोई नहीं है।
वहीं इमरजेंसी में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक 127 मरीजों की पर्चियां काटी गई थीं। क्रिटिकल केयर सेक्शन-एक में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखकर स्टाफ 21 मरीजों का उपचार कर रहे थे। डॉक्टर रूम खाली था लेकिन बाकी स्टाफ ड्यूटी पर मुस्तैद रहा।
इन चिकित्सकों की इमरजेंसी में ड्यूटी
डॉ. नायरा : मेडिसिन
डॉ. प्रिया : सर्जन
डॉ. रितिविक : सर्जन
डॉ. आदिल : हड्डी रोग विशेषज्ञ
डॉ. फिजान : प्रशिक्षु
डॉ. जनवी : नेत्र रोग विशेषज्ञ
डॉ. नेहा : नेत्र रोग विशेषज्ञ - (रात में)
डॉ. तोयबा खान : फाेरेंसिक विशेषज्ञ
डाॅ. याशिर : दंत रोग
डाॅ. समरीन कौर : मनोरोग
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रेफर का इंतजार करते रहते हैं एंबुलेंस चालक
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर एंबुलेंस चालक 24 घंटे मंडराते रहते हैं। जैसे ही कोई मरीज लेकर तीमारदार आता है तो चालक मरीज के स्थिति पर नजर लगाए रहते हैं। जैसे ही रेफर होने की बात चलती है तो तुरंत तीमारदार के पहुंचकर निजी या अन्य अस्पताल में बीमारी ठीक होने की सलाह देकर एंबुलेंस में ले जाने की बात कहते हैं।
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इमरजेंसी में डॉक्टरों को निर्देश हैं कि वह मरीज व तीमारदार से अच्छा व्यवहार करें। ड्यूटी पर जो भी था उसे मरीज का उपचार शुरू करना चाहिए था। पहले जांच करते और फिर न्यूरोलॉजिस्ट को बुलाकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाते
- डॉ. बीरेंद्र त्रिसल, सुपरिंटेंडेंट, जीएमसी जम्मू