देश के मेडिकल कालेजों में सीटें बढ़ने के साथ ढांचे को विकसित करने की दिशा में युद्धस्तर पर काम हुआ है, लेकिन मेडिकल कालेज जम्मू में अभी भी मेडिकल शिक्षा के लिए पुराने ढर्रे पर ही ढांचे को प्रयोग में लाया जा रहा है। भगवान का दर्जा पाने वाले डाक्टरों को तैयार करने वाले इस कालेज में अभी स्मार्ट कक्षाएं कोसों दूर हैं। सीटें बढ़ने पर लेक्चर हालों में डेस्क तो बढ़ा दिए गए, लेकिन ढांचे को अपग्रेड पर कुछ खास नहीं हो पाया है।
संभाग स्तर पर नब्बे के दशक में मेडिकल कालेज जम्मू का निर्माण किया गया था। कालेज में डाक्टरों को मेडिकल शिक्षा देने के लिए ढांचे को स्थापित किया गया। इस बीच समय के साथ मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी भी हुई, लेकिन ढांचे को विकसित करने पर कुछ ज्यादा हिम्मत नहीं दिखाई गई। कुछ समय पहले मेडिकल कालेज में सौ सीटों को बढ़ाकर डेढ़ सौ सीटें कर दी गई हैं, लेकिन लेक्चरर हालों की बात करें तो आगे के हिस्से में ही अतिरिक्त डेस्क लगाकर काम चलाया जा रहा है।
दूसरे राज्यों की बात करें तो वहां के मेडिकल कालेजों में स्मार्ट कक्षाएं शुरू की गई हैं। इन कक्षाओं में वाईफाई, इंटरनेट सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं। मसलन अगर दिल्ली में कोई महत्वपूर्ण लेक्चर चल रहा है तो उसे सीधे इंटरनेट पर प्रोजेक्टर या अन्य सुविधा से देखकर लाभ लिया जाता है। इसमें कालेजों को दूसरे कालेजों के साथ समझौता रहता है, लेकिन मेडिकल कालेज में अभी ऐसी कोई सुविधा नहीं है।
यहां एक लेक्चर हाल में 80 या उससे अधिक छात्र एक साथ बैठते हैं। इसी तरह लेक्चरर हाल के पास कोई वेटिंग रूम भी नहीं हैं। अगर एक लेक्चर चल रहा है तो दूसरा लेक्चरार वहां बैठकर अपना लेक्चर तैयार कर सके। एसोसिएटेड अस्पतालों की फैकल्टी में आधे लेक्चरर हैं। कश्मीर के मेडिकल कालेजों में लेक्चर कक्षाओं में प्रोजेक्ट की सुविधा उपलब्ध है।