कश्मीर के युवा आतंकियों को अब अय्याशी रास नहीं आ रही। आतंकियों की माशूकाएं उनका साथ छोड़ रही हैं। दरअसल, आतंकियों से जुड़ी युवतियां पढ़ी-लिखी हैं और अपना भविष्य बेहतर बनाना चाहती हैं। वे आतंकियों की आदतों और अय्याशी से तंग आ चुकी हैं।
इसलिए छुटकारा पाने के लिए सुरक्षा बलों को आतंकियों की सूचनाएं दे रही हैं। कई बड़े आतंकी थे, जिनको माशूकाओं की सूचना पर ढेर किया गया। आतंकी बुरहान वानी, सब्जार और दुजाना ऐसे ही मारे गए।
अब इससे मिली कामयाबी से सुरक्षा एजेंसियां भी आतंकियों तक पहुंचने के लिए उनकी माशूकाओं तक पहुंचने का नेटवर्क बनाने में जुटी हैं। सूत्रों का कहना है कि आतंकियों से कानून, इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि की पढ़ाई करने वाली छात्राएं जुड़ी हुई हैं, लेकिन यह आतंकियों से अब तौबा करने लगी हैं। वे आतंकियों की आदतों से तंग आ चुकी हैं। साथ ही वे अपने भविष्य को लेकर आगे बढ़ना चाहती हैं। इसलिए खुफिया एजेंसियों तक खुद ही इसकी सूचनाएं पहुंचा रही हैं।
खुफिया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आतंकियों से नाता रखने वाली युवतियां उच्च शिक्षा रखने वाली हैं। उनको समझ आ गया है कि आतंकियों के साथ उनका कोई उज्ज्वल भविष्य नहीं है। इसलिए वे उनसे दूरी बना रही हैं। उल्लेखनीय है कि सेना और अन्य सुरक्षाबलों की कार्रवाई में इस साल अब तक कश्मीर में 170 आतंकी मारे गए हैं। आपरेशन ऑलआउट में मिल रही कामयाबी के पीछे यह भी एक कारण है कि आतंकियों की माशूकाओं से उनकी जानकारी मिल रही है।