पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने अपने नए राजनीतिक करिअर की जम्मू से शुरुआत कर दी है। उन्होंने रविवार को सैनिक फार्म में जनसभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में लोगों की भीड़ जुटाकर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को अपनी मजबूती का संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह किसी के लिए बुरा नहीं कहेंगे। नई पार्टी के नाम पर अभी फैसला नहीं लिया है। जम्मू-कश्मीर के लोग नाम और निशान तय करेंगे। मैं अपनी पार्टी को हिंदुस्तानी नाम दूंगा। पार्टी के मुख्य मुद्दे होंगे- पूर्ण राज्य का दर्जा, भूमि का अधिका और मूल निवासी को रोजगार की बहाली।
जम्मू में आजाद ने कहा कि मेरे दिल की धड़कनों में जम्मू कश्मीर की पूरी जनता बसती है। 53 साल कांग्रेस की सेवा करने के दौरान कई ओहदें पर रहा। इसमें मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक शामिल हैं। अब मैं कुछ नहीं हूं सिर्फ इंसान हूं। सभी को पता है कि मेरा मजहब इस्लाम है। मेरे कांग्रेस छोड़ने के बाद बड़ी संख्या में प्रदेश के लोगों ने पार्टी से इस्तीफे दिए और सहयोग दिया। आप सभी लोगों के संदेश पढ़ने में मुझे एक साल लगेगा। इसके लिए सभी का आभार जताता हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पांच विधायक भी उनके साथ इसी मंच पर हैं।
कांग्रेस के लोग अब सिर्फ बसों में जेल जाते हैं, वे डीजीपी, कमिश्नरों को बुलाते हैं, अपना नाम लिखवाते हैं और एक घंटे के भीतर चले जाते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस विकसित नहीं हो पाई है। कांग्रेस हमने खून पसीने से बनाई है। यह कंप्यूटर-ट्वीट और मैसेज से नहीं बनी है। कांग्रेस नई पार्टी के एलान से बौखला गई है। उन्होंने कहा कि मैं किसी का बुरा नहीं चाहूंगा, मेरे लिए सभी बराबर हैं।
आजाद ने कहा कि जब 20 दिसंबर 1988 को इंदिरा गांधी को संसद से बर्खास्त कर तिहाड़ जेल ले गए। मैंने जनरल सेक्रेटरी के नाते 5000 यूथ कांग्रेस एकत्र कर जुलूस निकाला। इसके बाद हम सबको गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। संघर्ष को याद करते हुए आजाद ने कहा कि इंदिरा गांधी को सात दिन में छोड़ा लेकिन हम नहीं छूटे। हमने जमानत नहीं करवाई। जेल में सीमेंट का फर्श पर सोना पकड़ा था। जनवरी के महीने में एक कंबल बिछाने और आधा ओढ़ने के लिए मिलता था। खाने के लिए दो चपाती और एक दाल मिलती थी।