जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय गैंगस्टर के लिए पंजाब शरणदाता बन रहा है। गैंगस्टर यहां वारदात को अंजाम देकर पंजाब भाग रहे हैं। यही कारण है कि उनकी धरपकड़ में पुलिस सफल नहीं हो पाती है। जम्मू, सांबा और कठुआ जिले में सक्रिय गैंग के सरगना कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई सहित अन्य गैंग से प्रेरित होकर अब यहां घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ज्यूल चौक में सुमित की हत्या सिद्धू मूसेवाला की हत्या से प्रेरित दिखती है। गटरू गैंग का सरगना सुमित दो माह से जम्मू में रह रहा था। इसकी जानकारी हमलावरों को पहले से थी। उन्होंने उसकी रेकी कर थार का पीछा किया और अति व्यस्त स्थान को हमले के लिए चुना, ताकि सुमित के बचने की संभावना न हो। सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी यही रणनीति अपनाई गई थी। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर के गैंगस्टर अब देखा-देखी वारदातों को अंजाम देकर न सिर्फ अपने दुश्मन, बल्कि पुलिस को भी चुनौती दे रहे हैं। तीन अप्रैल, 2024 को कठुआ में गैंगवार में पुलिस पर फायरिंग हुई थी। इसमें सब इंस्पेक्टर दीपक शर्मा बलिदान हुए थे। इसमें शामिल अपराधियों ने भी पंजाब में शरण ली थी। जम्मू-कश्मीर में बढ़ती गैंगवार की घटनाएं पुलिस के कमजोर खुफिया नेटवर्क को उजागर करती हैं।
पुलिस को हर एंगल पर करना होगा
काम : पूर्व डीजीपी कुलदीप खोड़ा कहते हैं कि गैंगवार जैसी घटनाओं को खत्म करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा। इस तरह गैंग सिर्फ फिरौती और पैसे के लेनदेन का काम करते हैं। पुलिस को इन गैंग के बीच अपने सूत्र बनाने होंगे। गैंग में शामिल लोगों के खिलाफ हर एंगल पर काम करना होगा। ऐसी वारदात में शामिल लोगों के खिलाफ कई मामले दर्ज होते हैं। अगर वे किसी एक मामले में बच रहे तो दूसरे
केस में जांच तेज करनी होगी।