जम्मू। आतंकवाद से लोहा लेने वाली पुलिस के सामने अब गैंगवार जैसी वारदात नई चुनौती बनकर उभर रही हैं। दिनदहाड़े अति व्यस्त और सुरक्षाबलों से घिरे रहने वाले चौक-चौराहों पर गैंगवार पुलिस तंत्र के लिए आंख खोलने वाली घटना है। जम्मू संभाग में तीन साल में गैंगवार की पांच बड़ी घटनाएं हुई हैं।
इससे पहले 2006 में संजय गुप्ता उर्फ बकरा की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। अब सुमित जंडयाल उर्फ गटरू की हत्या ने पुलिस को न सिर्फ अपने खुफिया तंत्र, बल्कि अपराध कम करने की रणनीति में भी बदलाव करना होगा। गैंग में शामिल लोगों को पुलिस गिरफ्तार तो करती है, लेकिन मजबूत आपराधिक केस नहीं बनने के कारण कुछ समय बाद वे छूट जाते हैं और फिर वारदात को अंजाम देते हैं। ज्यूल चौक में मारे गए सुमित पर पीएएस लगा था। इस गैंग में शामिल लोगों का संबंध पंजाब सहित देश के अन्य राज्यों में सक्रिय गैंग के साथ भी हैं।
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पुलिस को तैयार करना चाहिए मजबूत केस : पूर्व डीजीपी : पूर्व डीजीपी एसपी वैद बताते हैं कि उनके कार्यकाल में ऐसे लोगों पर सख्ती से कार्रवाई हुई थी। आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर मजबूत केस तैयार कर उन्हें सजा दिलवाई है। ऐसे मामले में पुलिस को हर बिंदू पर जांच कर मजबूत केस तैयार चाहिए, ताकि असामाजिक तत्व के पास सजा से बचने का कोई विकल्प न हो।
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जम्मू, सांबा, कठुआ में सबसे ज्यादा वारदात : गैंगवार से जुड़ीं वारदात सबसे ज्यादा जम्मू, सांबा व कठुआ में हो रही हैं। तीनों जिले पंजाब से सटे हैं। 25 दिसंबर 2023 में सांबा के रामगढ़ में गटरू गैंग के सदस्य अक्षय शर्मा की खौफ गैंग ने हत्या कर दी थी। कठुआ गैंगवार में एसआई दीपक शर्मा बलिदान हुए थे। 27 अप्रैल, 2024 को मीरां साहिब में रेस्तरां मालिक व गांधीनगर में कारोबारी के घर उसे बंधक बनाया था।