फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बयान पर होती बहसों से बीच पैसों के अभाव में एक और गांधीयन सेंटर हुआ बंद

Thu, 15 Jun 2017 01:06 PM IST
amarujala.com- Written by: श्रेयांश त्रिपाठी
विज्ञापन
महात्मा गांधी - फोटो : FILE PHOTO
विज्ञापन
जम्मू विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति महात्मा गांधी के विचारों को बढ़ावा देने के नाम पर शुरू किया गया गांधीयन सेंटर फॉर पीस एंड कांफ्लिक्ट स्टडीज (जीसीपीसीएस) बंद हो गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से ग्रांट न मिलना इसकी वजह बताया जा रहा है। 
विज्ञापन


यह सेंटर जम्मू विश्वविद्यालय में 13 साल से चल रहा था। इसकी स्थापना एक अप्रैल, 2004 को हुई थी। सेंटर की एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन खुद विश्वविद्यालय के कुलपति थे। हर साल 25 से 30 कार्यक्रम आयोजित कराए जा रहे थे।

महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी समेत रमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता डा. किरण बेदी, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (जीएसडीएस) नई दिल्ली की निदेशक डा. सविता सिंह, मालवीय सेंटर फार पीस रिसर्च (एमसीपीआर) के प्रो. प्रियांकर उपाध्याय, यूनिवर्सिटी आफ ब्रैडफोर्ड, यूके के यूनुस समद जैसे कई लोगों ने अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

'गांधी के विचारों को पूछने वाला कोई नहीं रहा'

University of Jammu - फोटो : File Photo
इसकी स्थापना का मकसद भी यही थी कि गांधी के अहिंसा, शांति-सद्भाव से जुड़े विचारों को प्रसारित किया जाए। विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय कर छात्र-छात्राओं को गांधी के विचारों के प्रति जागरूक किया जाए। लेकिन कुछ साल चलाने के बाद, जबकि सेंटर को विभाग बनाए जाने की मुहिम जोर पकड़ रही थी, इस सेंटर को बंद कर दिया गया।    गांधी के विचारों को पूछने वाला कोई नहीं रहा। सेंटर को बंद करने के पीछे यही कहा जा सकता है। इस 31 मार्च को सेंटर यूजीसी की ग्रांट न आने की वजह से बंद हो गया है। -अनुराग गंगल, निदेशक, गांधीयन सेंटर फॉर पीस एंड कांफ्लिक्ट स्टडीज 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें