फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीरः इंटरनेट बंद होने से पुस्तकालयों में बढ़ी युवाओं की संख्या, खेल मैदान भी गुलजार

Sat, 04 Jan 2020 01:39 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
पुस्तकालय - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

अनुच्छेद 370 हटने के बाद नए जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच महीने से मोबाइल इंटरनेट बंद होने से बच्चों और युवाओं की दुश्वारियां तो बढ़ी हैं, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि उनके स्वभाव में बदलाव आया है। अभिभावकों की मानें तो वे परिवार में अधिक समय देने लगे हैं। माता-पिता, भाई-बहन के साथ समय बिताने लगे हैं। खेल के मैदान भी गुलजार हुए हैं।

विज्ञापन


सार्वजनिक पुस्तकालयों से दूर युवा अब वहां भी पहुंचने लगे हैं। इनकी तादाद में लगभग दस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से एडिक्ट बच्चों को शहर के साइक्रेटिक अस्पताल में परामर्श के लिए अभिभावक ले जाते थे, लेकिन अब ऐसे बच्चों की संख्या लगभग नहीं के बराबर रह गई है।
 
अमर उजाला ने शहर के विभिन्न सार्वजनिक पुस्तकालयों और खेल मैदानों का दौरा किया। पाया कि शहर में स्थित सरकारी और निजी पुस्तकालयों में युवाओं के साथ ही बुजुर्गों के पहुंचने का सिलसिला इंटरनेट बंद होने के बाद बढ़ा है।
विज्ञापन


गांधीनगर में एक निजी पुस्तकालय की सहायक तरनजीत कौर ने बताया कि पुस्तकालय में पहले 50-60 लोग आते थे। अब प्रतिदिन 100 के आसपास लोग पहुंच रहे हैं। लगता है कि इंटरनेट बंद होने से एक बार फिर से किताबें पढ़ने का चलन लौटने लगा है। गांधीनगर में ही संचालित एक अन्य पुस्तकालय की पुस्तकालय सहायक शिवानी ने बताया कि इंटरनेट सेवाएं ठप होने के बाद आने वालों की संख्या में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

Trending Videos
विज्ञापन

रिहाड़ी में एक पुस्तकालय के सहायक गौरव चौधरी के अनुसार यहां पहले 40-50 लोग आते थे, जिनकी संख्या 70 तक हो गई है। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों की संख्या ज्यादा है। इंटरनेट बंद होने के बाद खेल मैदानों का भी आकर्षण बढ़ गया है।

एमए स्टेडियम हो या फिर गांधीनगर का दशहरा ग्राउंड। यहां शाम के वक्त कोई क्रिकेट खेलता है तो कोई वॉलीबाल। दशहरा ग्राउंड में तो छोटे-छोटे बच्चे भी पहुंच रहे हैं। कक्षा पांच में पढ़ने वाले एक बच्चे के साथ दशहरा ग्राउंड पहुंचे एक अभिभावक ने बताया कि यह पहले दिन भर मोबाइल पर ऑनलाइन गेम्स में व्यस्त रहता था। अब खुद से खेल मैदान में चलने की बात करता है।

मनोवैज्ञानिक डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि इंटरनेट बंद होने से साइकेट्रिक अस्पताल में बच्चों से जुड़े मामले काफी हद तक कम हुए हैं। बच्चों में ज्यादा मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन देखने से मेमोरी लॉस के मामले ज्यादा आते हैं। पहले सप्ताह में एक से दो केस आते थे, लेकिन अब यह संख्या न के बराबर हो गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें