रिहाड़ी में एक पुस्तकालय के सहायक गौरव चौधरी के अनुसार यहां पहले 40-50 लोग आते थे, जिनकी संख्या 70 तक हो गई है। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों की संख्या ज्यादा है। इंटरनेट बंद होने के बाद खेल मैदानों का भी आकर्षण बढ़ गया है।
एमए स्टेडियम हो या फिर गांधीनगर का दशहरा ग्राउंड। यहां शाम के वक्त कोई क्रिकेट खेलता है तो कोई वॉलीबाल। दशहरा ग्राउंड में तो छोटे-छोटे बच्चे भी पहुंच रहे हैं। कक्षा पांच में पढ़ने वाले एक बच्चे के साथ दशहरा ग्राउंड पहुंचे एक अभिभावक ने बताया कि यह पहले दिन भर मोबाइल पर ऑनलाइन गेम्स में व्यस्त रहता था। अब खुद से खेल मैदान में चलने की बात करता है।
मनोवैज्ञानिक डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि इंटरनेट बंद होने से साइकेट्रिक अस्पताल में बच्चों से जुड़े मामले काफी हद तक कम हुए हैं। बच्चों में ज्यादा मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन देखने से मेमोरी लॉस के मामले ज्यादा आते हैं। पहले सप्ताह में एक से दो केस आते थे, लेकिन अब यह संख्या न के बराबर हो गई है।