भारत जी20 फोरम के जरिए दुनिया को अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद नये कश्मीर की झलक दिखाने जा रहा है। पहली बार जी20 देशों के सदस्य कश्मीर का दौरा कर रहे हैं। घाटी में केंद्रीय गृह मंत्रालय की निगरानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
पर्यटन मंत्रालय ने श्रीनगर में 22 मई से शुरू होने जा रही तीसरी पर्यटन वर्किंग ग्रुप मीटिंग के लिए विदेशी मेहमानों को जन्नत कहे जाने वाले और 1990 के दशक से पूर्व के कश्मीर की झलक से रूबरू कराने का खाका तैयार कर लिया है।
दो दिवसीय कार्यक्रम में विदेशी मेहमान जम्मू-कश्मीर की प्राचीन परंपरा, समृद्ध विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक खूबसूरती से परिचित होंगे। सरकार का मकसद घाटी में पर्यटन को बढ़ाना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। केंद्रीय पर्यटन सचिव अरविंद सिंह ने शुक्रवार को बताया कि बैठक की तैयारियां पूरी हो गई हैं।
पहले दिन फिल्म टूरिज्म पॉलिसी पर चर्चा होगी। दूसरे सत्र में फिल्म शूटिंग की संभावनाओं पर बात होगी। इसमें फिक्की और सीआईआई भी सहयोग कर रहे हैं। डल झील के किनारे विशेष कश्मीरी सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी। श्रीनगर के मेयर विदेशी मेहमानों को खास कश्मीरी दावत देंगे।
चीन समेत चार देशों ने नहीं कराया पंजीकरण...श्रीनगर में सोमवार से शुरू होने वाली बैठक के लिए 17 देशों के प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया है। तुर्किये, चीन और सऊदी अरब ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है।
इसके अलावा मेहमान देश मिस्र ने भी पंजीकरण नहीं कराया है। अन्य मुस्लिम देशों में यूएई, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और ओमान शामिल हो रहे हैं। बैठक के लिए देश 22 मई तक पंजीकरण करा सकते हैं।
बेहतरीन केसर, पेंटिंग और अखरोट का आकर्षण
विदेशी मेहमान कश्मीर बैठक के दौरान दुनिया के सबसे बेहतरीन केसर, कश्मीरी पेंटिंग और अखरोट के साथ कश्मीरी चाय का भी लुत्फ लेंगे। केंद्र सरकार के एक जिला एक उत्पाद के तहत विदेशी मेहमानों को तोहफे के तौर पर स्थानीय वस्तुएं दी जाएंगी।
फिल्म टूरिज्म से रोजगार बढ़ाना मकसद
कश्मीर कभी भारतीय फिल्मों की खूबसूरत लोकेशन के लिए जाना जाता था। जी-20 बैठक का उद्देश्य दुनियाभर की फिल्म इंडस्ट्री को कश्मीर की वादियों में शूटिंग के लिए आकर्षित करना है। इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे। विदेशी मेहमानों को दिखाया जाएगा कि अनुच्छेद 370 निरस्त किये जाने के बाद नये कश्मीर में पर्यटन तेजी से बढ़ा है।