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केंद्र सरकार ने राज्यसभा में खोला पाकिस्तान का काला चिट्ठा, आतंकी घटनाओं के बारे में दी ये जानकारी

Mon, 08 Feb 2021 02:20 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

पंचायतों के जरिए मनरेगा कार्यों के लिए 1000 करोड़ रूपये दिये गए
प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर में 54 प्रतिशत काम शुरू हो चुका है
2019 में पाकिस्तान द्वारा 216 बार घुसपैठ के प्रयास किए गए
2019 में आतंकवाद की घटनाओं में 127 लोग घायल हुए
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केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग आज अनुच्छेद 370 को लागू करने की नहीं बल्कि विकास और रोजगार की मांग कर रहे हैं। यह बात पाकिस्तान को पसंद नहीं आ रही है। इसी कारण पड़ोसी देश ने घुसपैठ और संघर्षविराम समझौते के उल्लंघन के प्रयास बढ़ा दिए हैं।

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गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि 2019 की तुलना में 2020 में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के प्रयास, पथराव और आतंकवाद की घटनाओं में कमी आयी, जबकि राज्य में मारे गये आतंकवादियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता अनुच्छेद 370 की मांग नहीं बल्कि विकास की मांग कर रही है। जनता मांग कर रही है कि नौजवानों को रोजगार मिले।

रेड्डी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विकास की राह पर चले, इसे रोकने के लिए पाकिस्तान ने घुसपैठ और संघर्ष विराम उल्लंघन के प्रयास बढ़ा दिए है। उन्होंने कहा कि 2019 में पाकिस्तान द्वारा 216 बार घुसपैठ के प्रयास किए गए जो 2020 में घटकर 99 रह गये। इसी प्रकार 2019 में आतंकवाद की घटनाओं में 127 लोग घायल हुए जिनकी संख्या 2020 में 71 थी।
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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2019 में 157 आतंकवादी मारे गये थे जिनकी संख्या 2020 में 221 थी। इसी प्रकार राज्य में 2019 में आतंकवाद की 594 घटनाएं और पथराव की 2009 घटनाएं हुई जिनकी संख्या 2020 में घटकर क्रमश: 224 और 327 रह गयी। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।


गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने जम्मू-कश्मीर में हुए विकास का ब्यौरा देते हुए कहा कि हाल में हुए ब्लॉक विकास परिषद के चुनावों में केंद्र शासित प्रदेश के 98 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि पंचायतों के जरिए मनरेगा कार्यों के लिए 1000 करोड़ रूपये दिये गए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के 100 प्रतिशत घरों में बिजली पहुंच गयी है जिनमें सीमांत क्षेत्र के गांव भी शामिल हैं।

रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर में 54 प्रतिशत काम शुरू हो चुका है जिसके तहत 20 परियोजनाएं चालू हैं। आठ परियोजनाओं को वर्तमान वित्त वर्ष तक पूरा कर लिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के कैडर से संबंधित है।

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, मौजूदा जम्मू-कश्मीर कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारी अब अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर का हिस्सा होंगे। केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए भविष्य के सभी आवंटन अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर से होंगे।

इस कैडर को अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर में विलय करने की जरूरत है ताकि इस कैडर के अधिकारियों को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया जा सके। इससे वहां कुछ हद तक अधिकारियों की कमी दूर हो सकेगी।

इससे पूर्व विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर कैडर को अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर में विलय करने की जरूरत पर सवाल उठाया।

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आजाद ने कहा कि सरकार ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की बात की थी लेकिन इस विधेयक से ऐसी आशंका बन रही है कि वह जम्मू-कश्मीर को स्थायी रूप से केंद्रशासित बनाए रखना चाहती है। अगर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देना ही है तो कैडरों के विलय की क्या जरूरत है।

उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में उद्योगों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की कमी आयी है। वहां पहले ही उद्योगों की संख्या कम थी और बाद में उनमें से भी बड़ी संख्या में उद्योग बंद हो गए, जिससे रोजगार पर असर पड़ा।

आजाद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विकास होने का दावा वास्तविक नहीं है और जमीन पर विकास नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि सड़कें बदहाल हैं और जलापूर्ति एवं बिजली की स्थिति भी अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वहां निर्वाचित सरकार होती तो कुछ समाधान निकल सकता था। उन्होंने हाल ही में स्थानीय चुनाव कराए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि विधानसभा के भी चुनाव कराए जाने चाहिए क्योंकि विधायक कानून निर्माता भी हैं।

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भाजपा सदस्य दुष्यंत गौतम ने कहा कि अनुच्छेद 370 के कारण आजादी के 70 साल बाद भी वहां विभिन्न लोगों की मौलिक जरूरतें पूरी नहीं हुयीं। ऐसा लगता है कि उस अनुच्छेद से कहीं न कहीं लोगों का शोषण हो रहा था। लेकिन उसके हटने के बाद लोगों की मौलिक जरूरतें पूरी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि विगत में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रविरोधी ताकतें मौजूद थीं और उस दौरान सुरक्षाबलों पर पथराव जैसी घटनाएं भी होती रहती थीं।
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अन्नाद्रमुक के नवनीत कृष्णन ने विधेयक के प्रावधानों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे जम्मू-कश्मीर में अधिकारियों की कमी दूर हो सकेगी। राजद के मनोज कुमार झा ने सवाल किया कि कैडरों का मौजूदा बदलाव स्थायी होगा या अस्थायी। मोबाइल फोन सेवा के संबंध में उन्होंने कहा कि अब वहां 4जी सेवा शुरू हो गयी है लेकिन इसके बाधित होने से विगत कुछ महीनों में वहां के छात्रों पर इसका प्रतिकूल पड़ा और कई छात्र विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला नहीं ले पाए।

आप के नेता सुशील कुमार गुप्ता और पीडीपी सदस्य मीर मोहम्मद फैयाज ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल करने की मांग की, वहीं भाजपा के शमशेर सिंह मन्हास ने रोजगार बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि अधिक संख्या में अधिकारियों की नियुक्ति से विकास की गति को बल मिलेगा। चर्चा में बसपा के अशोक सिद्धार्थ, बीजद के अमर पटनायक ने भी भाग लिया।

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