आखिरकार 12 साल के अंतराल के बाद बुधवार को रियासत में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव संपन्न हुए। मतदान को लेकर लखनपुर से लेकर कश्मीर घाटी तक सिखों में जहां भारी उत्साह दिखा, वहीं कई स्थानों पर धांधली का आरोप लगने से हंगामा भी हुआ।
कठुआ में सिखों ने पठानकोट-जम्मू नेशनल हाईवे पर देर रात जाम लगा दिया। प्रशासन पर धांधली का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उनके दो उम्मीदवारों को विजेता घोषित करने के बाद फिर से गिनती करवाई गई।
विजेता के कुछ वोट रद्द कर उन्हें हरा दिया गया। समाचार लिखे जाने तक हाईवे पर जाम लगा हुआ था। बख्शी नगर में वोट डालने से वंचित रहने वाले परिवार ने हंगामा किया। इससे एक घंटा मतदान बंद रहा।
डीसी के हस्तक्षेप के बाद परिवार के पांचों सदस्यों को वोट डालने दिया गया। श्रीनगर में रंगरेट-10 (बेमिना) में मतदाताओं द्वारा गलत मतदाता सूची के खिलाफ प्रदर्शन किया।
ज्यादातर क्षेत्रों से विजेताओं की अधिकारिक घोषणा संबंधित जिला प्रशासन की ओर से वीरवार को की जाएगी, लेकिन जेएंडके स्टेट गुरुद्वारा प्रबंधक बोर्ड के गठन को लेकर जोड़तोड़ शुरू हो गया है। बोर्ड के चेयरमैन पद के लिए एकबार फिर दो गुट आमने सामने हैं।
इनमें एक गुट वर्तमान चेयरमैन त्रिलोचन सिंह वजीर का है, तो दूसरा महंत मंजीत सिंह के अनुयायियों का है। नानक नगर से मनमोहन सिंह खालसा, जम्मू ईस्ट से रमनीक सिंह, जम्मू वेस्ट से मोहिंदर सिंह, गाडीगढ़ से फतेह सिंह, डिगियाना से हरजिंदर सिंह रैना, गोल गुजराल से दरबिंदर सिंह, अखनूर से मोहिंदर सिंह, आरएस पुरा से जगजीत सिंह, दरसोपुर से राजा सिंह, किरपिंड से कुलदीप सिंह और बिश्नाह से अवतार सिंह विजयी रहे। जम्मू जिले में 49.15 फीसदी मतदान हुआ।
कश्मीर घाटी में सबसे आश्चर्यजनक परिणाम यह रहा कि बरजुल्ला निर्वाचन क्षेत्र में जीपीसी श्रीनगर के कार्यवाहक अध्यक्ष कुलदीप सिंह और करण नगर से सचिव मंजीत सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा। श्रीनगर में 54 फीसदी मतदान हुआ। खासबात यह है कि विजयी 11 उम्मीदवारों में से तीन निर्विरोध चुने गए, जबकि आठ नए चेहरे कमेटी में पहुंचे हैं।