केंद्र सरकार के मिशन कश्मीर के तहत मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अब पीओके के लोगों के दर्द को आवाज देंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद पाकिस्तान पर महबूबा के तेवर पहले से ज्यादा तल्ख हुए हैं।
कश्मीर के हालात सुधारने के लिए महबूबा अब तक पाकिस्तान से बातचीत पर जोर देती रही हैं, लेकिन, पहली बार उन्होंने वार्ता में अड़ंगे के लिए सीधे पाक को दोषी ठहराया है।
पाक पर महबूबा के तीखे हमले केंद्र की रणनीति का हिस्सा हैं। पाकिस्तान कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाता रहा है, इसलिए कश्मीर के अवाम द्वारा चुनी गई सरकार के मुखिया के जरिए पाक के नापाक इरादे को उजागर करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
मोदी सरकार पाकिस्तान पर बढ़ाना चाहती है दबाव
नवाज शरीफ के साथ प्रधानमंत्री मोदी
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पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए तय केंद्र प्रायोजित योजनाओं में पीओके के लिए अलग से फंड की व्यवस्था का निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की है। डॉ. सिंह ने कहा कि पीओके भी भारत का अभिन्न अंग है इसलिए वहां की अवाम के प्रति हमारा दायित्व बनता है।
पीओके के निवासी यहां की योजनाओं का फायदा ले सकते हैं। क्रास बार्डर फायरिंग में मारे जाने वाले या घायल पीओके के लोगों के लिए भी मुआवजे की व्यवस्था कर इसकी शुरुआत कर दी है।
पीओके में मानवाधिकारी उल्लंघनों को लोंगों तक पहुंचाएंगी महबूबा
पीओके
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शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पीओके के लिए विधानसभा में खाली रखी गई 24 सीटों को भरने के लिए संविधान विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है। केंद्र सरकार कश्मीर में सभी धड़ों से बातचीत के लिए केंद्र वार्ताकारों का एलान कर सकती है। इसमें गैर राजनीति शख्सियत को शामिल करने का निर्णय हुआ है। नाम वैसे होंगे जिनपर कश्मीरियों को भी यकीन हो।
अगले सप्ताह सर्वदलीय समिति का कश्मीर दौरा तय है। सर्वदलीय समिति की अलगाववादियों से भी बातचीत हो सकती है। लेकिन, सरकारी स्तर पर अलगाववादियों को तब तक तरजीह नहीं दी जाएगी जब तक वे संविधान के दायरे में वार्ता के लिए तैयार नहीं होते हैं।
रणनीति के तहत पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान सेना की बर्बरता के बारे में महबूबा अब जनसभाओं में और रैलियों में भी लोगों को जानकारी देंगी। इसमें पीओके और बाल्टिस्तान के कुछ प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की योजना है। आजादी की मांग पर भटके युवाओं को यह समझाया जाएगा कि कश्मीर जैसी आजादी किसी और इस्लामिक देश में संभव नहीं है। महबूबा ने इस अभियान की शुरुआत भी कर दी है।