मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने फिर दोहराया कि पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते मेरा सपना है। रियासत की शीतकालीन राजधानी में अपने आवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुफ्ती ने कहा कि यह पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के एजेंडे में भी शामिल है, लेकिन, यह एक विकासवादी प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से दोस्ती होती है तो जम्मू-कश्मीर के लोगों को सुकून और अमन मिलता है, जैसा कि अटलजी के वक्त में हुआ था। यह पूछे जाने पर कि यह काम वाजपेयी के जमाने में ज्यादा आसान था या मोदी के जमाने में, मुख्यमंत्री ने कहा कि कूदकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए।
मोदी का मुकम्मल फोकस राज्य के संपूर्ण और तीव्र विकास पर है। प्रधानमंत्री मोदी से पड़ोसी देश के साथ संबंध सुधारने के बाबत मेरी लगातार बात हो रही है, लेकिन मैं डिक्टेटर नहीं हूं। मैं उन्हें डिक्टेट नहीं कर सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दिशा में सकारात्मक पहल होगी।
मोदी द्वारा कश्मीर दौरे के दौरान इस संबंध में कुछ भी नहीं कहने के संबंध में मुफ्ती का कहना था कि वे ऐसा क्यों कहेंगे। उनपर ऐसा कहने का कोई दबाव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी प्रधानमंत्री से अलग से मुलाकात हुई थी और उस दौरान मैंने उनसे कहा था यह बहुत अच्छा होगा अगर वाजपेयी के कार्यकाल की ही तरह पाकिस्तान से वार्ता की प्रक्रिया शुरू की जाए। लेकिन, वो देश के प्रधानमंत्री हैं और फैसला उनको ही लेना है।
हालांकि, मुफ्ती ने जोर देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसके अलावा कोई विकल्प है। उन्होंने कहा कि मेरी ओर से लगातार इस बात पर जोर दिया जा रहा है। यह एक प्रक्रिया है और यह भी जरूरी नहीं कि प्रधानमंत्री हर बात पर सहमत हों। मुफ्ती ने कहा कि वो कोशिश करना नहीं छोड़ेंगे।