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पूर्व आईएएस शाह फैसल की पहले जनसभा, बोले-गवर्नर राज से आवामी राज सौगुना बेहतर

Tue, 05 Feb 2019 03:44 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
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शाह फैसल - फोटो : एएनआई
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पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल द्वारा अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत अपने पैतृक जिले कुपवाड़ा से की गई। उन्होने सोमवार को उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा के टीआरसी ग्राउंड में एक जन सभा को संबोधित किया। उन्हें सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग वहां पहुंचे थे।
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इनमें अधिकतर लोग उसके इलाके लोलाब से आए हुए थे। इस दौरान शाह फैसल ने कहा कि गवर्नर राज से आवामी राज सौ गुना बेहतर है, क्योंकि गवर्नर राज में नौकरशाही जम्हूरियत को पनपते नहीं देती है। उन्होंने यह भी कहा कि वो आवाम की ताकत आवाम को देना चाहते हैं, इसलिए वो सियासत में कूदे हैं।

टीआरसी ग्राउंड में जनसभा को संबोधित करते हुए सोमवार को शाह फैसल ने कहा कि वह पिछले 10 वर्षों से कश्मीर की स्थिति को देखकर परेशान थे। उन्होंने कहा कि कश्मीर में हो रहे अत्याचारों ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया और अब वह लोगों के लिए कुछ करना चाहते हैं।
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फैसल ने कहा कि हमें सभी राजनीतिक दलों को कश्मीर के मुद्दे के समाधान के लिए एक मंच पर लाने की जरूरत है क्योंकि कश्मीर मसले का समाधान अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि इसी कश्मीर मुद्दे के चलते यहां के लोगों ने बहुत मुसीबतें झेली हैं जिससे मैं उन्हें राहत दिलवाना चाहता हूं। फैसल ने कहा कि जो लोग मामलों के शीर्ष पर हैं उनमें विवेक का अभाव है और वे इस समस्या के समाधान के लिए आगे नहीं आते हैं।              
 
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भ्रष्टाचार की राजनीति करने वालों को लताड़ा
फैसल ने कहा कि भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को खोखला कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में मैंने महसूस किया कि कश्मीर में परिवर्तन लाया जा सकता है। मैं कोई विकल्प नहीं हूं, बल्कि एक एडिशन हूं और समाज में बड़े पैमाने पर बदलाव लाना चाहता हूं। फैसल ने कहा कि हमारे पीएचडी विद्वान शहीद हो गए हैं, जबकि कुछ लोग अपनी कुर्सी पर बैठकर आनंद लेते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोग बलिदान देते हैं और लोग कहते रहते हैं कि लड़के 500 रुपये में पत्थर मारते हैं।

उम्मीद से ज्यादा लोगों ने दिया समर्थन
फैसल ने यह भी कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतने लोग आएंगे जो यह साबित करता है कि लोगों ने मुझे समर्थन दिया है। पिछले 10 सालों से जैसे मैं जेल में था और लोगों के लिए कुछ नहीं बोल पाता था।

यी करी ती करी फैसल करी लो लो के लगे नारे
बता दें कि शाह फैसल की जन सभा में ‘आया आया शेर आया’ और ‘यी करी ती करी फैसल करी लो लो’ (कश्मीरी में जिसका अर्थ है जो करेगा अब फैसल करेगा) जैसे नारे लगे। इससे पहले ऐसे नारे शेख अब्दुल्ला की जन सभाओं में सुनने को मिलते थे जब लोग नारे लगाते थे ‘‘यी करी ती करी बब करी लो लो’’।
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